बारिश का कहरः जज और सीईओ को जेसीबी से निकाला
दंतेवाड़ा | संवाददाता छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 24 घंटे की तेज बारिश ने जमकर तबाही मचाई है. डंकनी नदी का पुराना पुल टूट गया है. सुरभि कॉलोनी के आधे घरों में करीब 10 फिट तक पानी भर गया. जो लोग घरों में फंस गए उन्हें बड़ी मशक्कत से बाहर निकाला गया.
हालात शहर के ये थे कि जिला जज और जिला पंचायत सीईओ को जेसीबी में बैठाकर बाहर निकाला गया. वहीं शंखिनी नदी पर बना पुल बह गया. यह पुल 50 टन से भी अधिक क्षमता का था.
शहर की तबाही का जायजा लेने निकले कलेक्टर कुणाल दुदावत ने नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया है.
वार्ड नंबर 10 के पार्षद मनीष भट्टाचार्य ने बताया कि करीब 70 घर पूरी तरह से डूब गए थे. इन घरों में राशन तक नहीं बचा.
इसी वार्ड में जज, सीईओ और डीएफओ का निवास भी है. ये सभी डूब गए थे. उन्हें जेसीबी से रेस्क्यू कर निकाला गया.
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष का बड़ा आरोप पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तूलिका कर्मा ने आरोप लगाया है कि प्रशासन की कोई तैयारी नहीं थी. लोग घरों में फंसे रहे. बचाव के लिए कोई टीम तैनात नहीं थी. शहर में तबाही का मंजर होते हुए भी ना तो नगर पालिका अध्यक्ष हाल जानने आईं और ना ही विधायक पहुंचे.
उन्होंने कहा कि बारिश के लिए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया था. इसके बावजूद राहत शिविर भी तैयार नहीं किए गए. इतना ही नहीं शहर में अलर्ट को लेकर मुनादी भी नहीं करवाई गई. ये सरकार लोगों की जान से खेल रही है.
प्रशासन की खामी
पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने आरोप लगाया है कि जिस तरह से प्रशासन को भारी बारिश होने की सूचना मौसम विभाग से मिली थी, उसके बाद जो तैयारी करनी थी वह नहीं की गई. यह प्रशासन की खामी है.
उन्होंने कहा कि बारिश ने शहर को तबाह कर दिया है. घरों से कोई कुछ नहीं निकाल पाया. लोगों ने किसी तरह से जान बचाई. नगर पालिका के कर्मचारियों के घरों में तो कुछ भी नहीं बचा.
सिर्फ नक्सल मोर्चे के लिए फोर्स- सोरी
समाजसेवी सोनी सोरी ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि फोर्स सिर्फ नक्सल मोर्चे के लिए ही है. क्या राहत पहुंचाने और बचाव कार्य के लिए नहीं है. मैं सुरभि कॉलोनी में ही रहती हूं. यहां करीब 20 घरों में 10 फिट से अधिक पानी घुसा था.
उन्होंने कहा कि कॉलोनी के लोग ही मदद करने में जुटे थे. कोई अधिकारी हाल-चाल लेने नहीं पहुंचा. सुबह डीएम जायजा लेने पहुंचे. जब लोग जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे, उस समय प्रशासनिक अमला नहीं आया. अब नुकसान की भरपाई तो प्रशासन कर ही देगा, नहीं भी होगी तब भी कोई फर्क नहीं पड़ता. जनता को तो सरकार की संवेदनहीनता को सहन करने की आदत पड़ चुकी है.