'मृत वोटरों के साथ राहुल गांधी ने चाय पी'
पटना । डेस्क: विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को बिहार के तीन निवासियों से मुलाकात की, जिन्हें निर्वाचन आयोग (ईसी) ने आधिकारिक तौर पर "मृत" घोषित कर मतदाता सूची से हटा दिया था. जिन्हें एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में जीवित पेश किए गए थे.
राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट में कहा, "जीवन में कई रोचक अनुभव हुए, लेकिन 'मृत लोगों' के साथ चाय पीने का मौका कभी नहीं मिला. इस अनूठे अनुभव के लिए, धन्यवाद निर्वाचन आयोग."
यह मुलाकात कांग्रेस के उन आरोपों के बीच हुई है कि बिहार में निर्वाचन आयोग की विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत नाम हटाने की कार्रवाई गरीब, पिछड़े समुदायों और अल्पसंख्यकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने की साजिश है.
कांग्रेस ने एक्स पर आरोप लगाया कि यह गरीब, पिछड़े समुदायों और अल्पसंख्यकों के मतदान अधिकारों को छीनने की "स्पष्ट साजिश" है.
तीन मतदाता वैशाली जिले की 68 वर्षीय वंचिया देवी, प्यारे राय की पत्नी; आरा जिले के 41 वर्षीय मिंटू पासवान, उदय पासवान के पुत्र; और वैशाली जिले के 48 वर्षीय हरेंद्र राय, नशीब राय के पुत्र मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची संशोधन मामले की सुनवाई के दौरान पेश हुए थे.
राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, जो इस मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक हैं, ने इन्हें जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ के सामने पेश किया और इसे "दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा मताधिकार छीनने का अभ्यास" बताया.
यादव ने कोर्ट में कहा, "पैंसठ लाख नाम हटाए गए. भारत के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. हटाए गए मतदाताओं की संख्या एक करोड़ को पार करने वाली है. यह संशोधन का मुद्दा नहीं है. इन्हें देखिए. इन्हें मृत घोषित किया गया. ये सूची में नहीं हैं. लेकिन ये जीवित हैं. इन्हें देखिए."
वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने "मृत" मतदाताओं की उपस्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कोर्ट में कहा, "यह क्या ड्रामा है?"
सुप्रीम कोर्ट ने पहले बिहार के ड्राफ्ट मतदाता सूची से 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विवरण का खुलासा करने की मांग वाली याचिका पर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था.
यादव ने तर्क दिया कि बिहार में बहिष्करण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और चेतावनी दी कि जहां कहीं भी एसआईआर लागू किया जाएगा, वहां ऐसा ही परिणाम होगा.
उन्होंने कहा, "बड़े पैमाने पर बहिष्करण शुरू हो चुका है. बहिष्करण 65 लाख से कहीं अधिक है. यह एसआईआर के कार्यान्वयन की विफलता नहीं है, बल्कि यह तथ्य है कि जहां कहीं भी एसआईआर लागू होगा, परिणाम वही होगा. यह धारणा कि बिहार की मतदाता सूची में फर्जीवाड़ा था और इसे ठीक करने की जरूरत थी, गलत थी."