मोसाद के गलत आकलन और नेतृत्व परिवर्तन पर उठे सवाल
तेहरान । डेस्क: तेहरान टाइम्स के हवाले से खबर है कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियान और उसके बाद उपजे राजनीतिक घटनाक्रमों ने मध्य पूर्व की भू-राजनीति को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है. युद्ध की शुरुआत से कुछ महीने पहले ईरान के पूर्व शाह के बेटे रज़ा पहलवी ने इजराइल का दौरा किया था. इस यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, मोसाद के वरिष्ठ अधिकारियों और नेसेट के प्रमुख सदस्यों के साथ गुप्त बैठकें की थीं.
सामने आई विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन बैठकों के दौरान इजराइली पक्ष को यह आकलन सौंपा गया था कि यदि ईरान पर सैन्य हमला किया जाता है, तो इसके शुरुआती दबाव से ईरान में व्यापक घरेलू विरोध प्रदर्शन भड़क उठेंगे. यह दावा भी किया गया था कि ये जन-आक्रोश अंततः इस्लामिक रिपब्लिक के पतन का कारण बनेगा.
इसी आकलन पर भरोसा करते हुए इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद ने सैन्य विकल्प के साथ-साथ 'सत्ता परिवर्तन' का एक पूरा खाका तैयार किया और इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने पेश किया. हालांकि यह रणनीति इजराइल द्वारा पूर्व में भी अन्य अमेरिकी प्रशासनों को सुझाई गई थी, लेकिन वे इसे लागू करने से हिचकिचाते रहे थे. इस बार यह योजना आगे बढ़ी, लेकिन जमीन पर घटनाक्रम बिल्कुल विपरीत दिशा में मुड़ गए.
राष्ट्रीय एकजुटता ने ध्वस्त किए रणनीति के दावे
रणनीतिकारों की यह उम्मीद कि सैन्य हमलों से ईरान का राजनीतिक ढांचा तेजी से बिखर जाएगा, पूरी तरह धराशायी हो गई. बाह्य हमलों ने ईरान के भीतर राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए राष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करने का काम किया. ईरानी समाज के एक बड़े हिस्से ने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपनी सरकार का समर्थन किया.
इस गलत मूल्यांकन के सामने आने के बाद मोसाद के भीतर खुफिया विफलता को लेकर बहस तेज हो गई. जून 2021 से मोसाद का नेतृत्व कर रहे डेविड "डाडी" बार्निया ने जून 2026 में अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद पद छोड़ दिया, जिसके बाद रोमान गोफमैन को नया प्रमुख नियुक्त किया गया. यद्यपि आधिकारिक तौर पर इसे एक सामान्य प्रक्रिया बताया गया, लेकिन इजराइली मीडिया ने इसे ईरान अभियानों की विफलता से जोड़ा.
पदभार संभालते ही रोमान गोफमैन ने मोसाद के डिप्टी डायरेक्टर और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी को बर्खास्त कर दिया. रिपोर्टों के मुताबिक, बर्खास्त किए गए डिप्टी डायरेक्टर को बार्निया का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना जा रहा था. इन बदलावों ने यह संकेत दिया कि इजराइल अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल न कर पाने के बाद एजेंसी के भीतर गहरा फेरबदल कर रहा है.
सूचना युद्ध और मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन्स का सहारा
हाल के हफ्तों में पूर्व इजराइली अधिकारियों के साक्षात्कारों से यह स्पष्ट हुआ है कि मोसाद ने केवल सैन्य अभियानों पर निर्भर रहने के बजाय मनोवैज्ञानिक युद्ध और मीडिया ऑपरेशन्स में भारी निवेश किया था. 2021 में बार्निया के कार्यकाल में मोसाद ने एक विशेष 'इन्फ्लुएंस ऑपरेशन्स' शाखा का गठन किया था. इसका मुख्य कार्य सोशल मीडिया, फर्जी ऑनलाइन खातों, एआई-जनरेटेड इंफ्लुएंसर्स और चुनिंदा संवेदनशील जानकारियों के जरिए ईरानी समाज और सत्ता के बीच दूरी पैदा करना था.
इस बहुस्तरीय रणनीति का उद्देश्य सैन्य हमलों और सूचना युद्ध को मिलाकर ईरानी शासन की नींव को कमजोर करना था. हालांकि, युद्ध खत्म होने के बाद भी ईरान की राजनीतिक व्यवस्था पूरी तरह अक्षुण्ण रही. पूर्व अधिकारियों ने बाद में स्वीकार किया कि ऐसे मनोवैज्ञानिक अभियानों का असर दिखने में लंबा समय लगता है और युद्ध के तात्कालिक दौर में यह परिणाम देने में विफल रहे.
इस पूरे प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक खुफिया प्रतिस्पर्धा केवल पारंपरिक जासूसी तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर स्पेस और एआई चालित सूचना ऑपरेशन्स तक फैल चुकी है. इसके बावजूद, किसी देश की आंतरिक जनभावना और राष्ट्रीय अस्मिता का सही मूल्यांकन न कर पाना आधुनिक खुफिया एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.