पृथ्वीराज चव्हाण बोले: IndiGo को बांटो, एकाधिकार खत्म करो
मुंबई । डेस्क: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने देश के नागरिक उड्डयन बाजार पर दो निजी कंपनियों के बढ़ते प्रभुत्व को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है. सोमवार 8 दिसंबर, 2025 को मुंबई में पत्रकारों को संबोधित करते हुए, चव्हाण ने IndiGo के लगभग 65% बाजार हिस्सेदारी और टाटा समूह की बढ़ती हिस्सेदारी को प्रतिस्पर्धा के लिए "गंभीर खतरा" बताया.
उन्होंने मांग की कि संकटग्रस्त IndiGo को दो कंपनियों में विभाजित किया जाए ताकि बाजार में उचित प्रतिस्पर्धा बहाल हो सके.
चव्हाण ने कहा कि 2004 में भारत में 10 एयरलाइनें थीं, जो अब घटकर केवल दो बड़ी कंपनियों तक सीमित हो गई हैं. उन्होंने 40 करोड़ यात्रियों के लिए इसे "खतरनाक" बताया. IndiGo की हालिया उड़ान व्यवधानों को "चौंकाने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण" करार देते हुए, उन्होंने इसके लिए नियामक चूक और सरकार तथा निजी वाहकों के बीच कथित मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया.
उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू के इस्तीफे, IndiGo के सीईओ के निलंबन और डीजीसीए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
चव्हाण ने केंद्र सरकार से किसी भी एयरलाइन के लिए बाजार हिस्सेदारी को 30% तक सीमित करने, IndiGo को दो भागों में विभाजित करने और एक राष्ट्रीय वाहक को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया. उन्होंने यूपीए शासन के दौरान प्रस्तावित नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (CAA) को लागू करने की अपनी मांग भी दोहराई.
पूर्व मुख्यमंत्री ने IndiGo की गड़बड़ी से प्रभावित यात्रियों के लिए ₹1,000 करोड़ का मुआवजा कोष बनाने की भी मांग की और एकाधिकारवादी प्रथाओं पर अंकुश लगाने में विफल रहने के लिए प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को भंग करने और एक मजबूत नियामक निकाय से बदलने का आह्वान किया.
राजनीतिक फंडिंग का मुद्दा उठाते हुए, चव्हाण ने आरोप लगाया कि भाजपा को IndiGo से जुड़े चुनावी बॉन्ड के माध्यम से ₹56 करोड़ प्राप्त हुए, जिससे "हितों के टकराव" पर गंभीर संदेह पैदा होता है और उन्होंने विमानन कंपनियों से राजनीतिक फंडिंग के पूर्ण ऑडिट की मांग की.
उन्होंने गौतम अडानी के विमानन क्षेत्र में विस्तार की खबरों पर भी चिंता जताई और कड़ी नियामक निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया.