राष्ट्रपति ट्रंप का ऐलान: वैकल्पिक कानूनों के जरिए जारी रहेगा वैश्विक टैरिफ
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक करार देने वाले सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे एक "कलंक" बताया है. शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ने शीर्ष अदालत पर "विदेशी हितों से प्रभावित" होने का आरोप लगाया.
उन्होंने फैसले का समर्थन करने वाले उदारवादी न्यायाधीशों को देश के लिए अपमानजनक और उनके साथ खड़े होने वाले रूढ़िवादी न्यायाधीशों को संविधान के प्रति "देशद्रोही और वफादार नहीं" करार दिया.
हालांकि, इस कानूनी बाधा के बावजूद ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह अपने आर्थिक एजेंडे से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने घोषणा की कि वह 'ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट ऑफ 1962' का उपयोग करके अपने टैरिफ अभियान को जारी रखेंगे. राष्ट्रपति ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि उनके पास टैरिफ लगाने का अधिकार हमेशा से था और रहेगा.
सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत बिना कांग्रेस की सहमति के टैरिफ लगाने की ट्रंप की शक्ति को समाप्त कर दिया है. अदालत के बहुमत ने जोर देकर कहा कि शांति काल में टैरिफ लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है.
इस फैसले के तुरंत बाद अमेरिका की प्रभावी टैरिफ दर 12.7 प्रतिशत से घटकर 8.3 प्रतिशत पर आ गई है, जिससे सरकार को मिलने वाले अरबों डॉलर के राजस्व पर खतरा मंडरा रहा है.
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुमानों के अनुसार, इन टैरिफ से 2026 से 2035 के बीच लगभग 3.6 ट्रिलियन डॉलर का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद थी. इस वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए ट्रंप ने अब 1962 के कानून का सहारा लिया है, जिसके तहत वह अगले तीन दिनों में 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ लागू करने की योजना बना रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप का तर्क है कि वैकल्पिक कानूनों के तहत उनके पास पहले की तुलना में अधिक टैरिफ वसूलने की शक्ति है. उन्होंने कहा कि आगामी पांच महीनों के दौरान अनुचित व्यापार प्रथाओं की जांच की जाएगी, जिसके आधार पर अन्य देशों पर 'उचित टैरिफ' लगाए जाएंगे.
हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के लिए यह राह इतनी आसान नहीं होगी. विशेषज्ञों के अनुसार, IEEPA की तुलना में अन्य कानूनी उपकरणों के माध्यम से टैरिफ लागू करना अधिक जटिल और समय लेने वाला है. इससे अमेरिकी व्यवसायों और उपभोक्ताओं के बीच अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा.
यह भी ध्यान देने योग्य है कि ट्रंप ने टैरिफ का उपयोग केवल राजस्व के लिए नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक हथियार के रूप में भी किया है, जैसे कि रूस से तेल खरीदने पर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ.
अब जबकि उनके 'टैरिफ हथियार' की शक्ति कुछ कम हुई है, विशेषज्ञों को डर है कि राष्ट्रपति अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबंधों या सैन्य बल जैसे कठोर कदमों पर अधिक निर्भर हो सकते हैं.