नेपाल: राष्ट्रपति और सेना प्रमुख ने की शांति और संवाद की अपील
काठमांडू । डेस्क: नेपाल में चल रहे जनरेशन-जेड आंदोलन के हिंसक प्रदर्शनों के बीच, जिसमें अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं. राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल और नेपाली सेना के प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और संवाद के रास्ते पर आने की अपील की है. यह अपील तब आई है जब प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय (शीतल निवास), और पशुपतिनाथ मंदिर जैसे प्रमुख सरकारी और सांस्कृतिक स्थलों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया.
राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी पक्षों, विशेष रूप से प्रदर्शनकारी नागरिकों, से शांतिपूर्ण तरीके से जनरेशन-जेड आंदोलन के मुद्दों को हल करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा स्वीकार हो चुका है, और अब राष्ट्र को आगे बढ़ने के लिए हिंसा और क्षति को रोकना होगा.
“मैं सभी पक्षों से शांति बनाए रखने, राष्ट्र को और नुकसान से बचाने और बातचीत की मेज पर आने की अपील करता हूं. लोकतंत्र में, नागरिकों की मांगों को संवाद और समझौते के माध्यम से हल किया जा सकता है,” राष्ट्रपति पौडेल ने अपने बयान में कहा.
यह अपील उन हिंसक प्रदर्शनों के बाद आई है, जिनमें सुरक्षा बलों द्वारा संसद भवन के बाहर प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी में कम से कम 19 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए. प्रदर्शनकारियों ने बाद में संसद भवन और शीतल निवास में राष्ट्रपति कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों पर धावा बोल दिया.
सेना प्रमुख का संदेश: राष्ट्रीय एकता और शांति की पुकार
मंगलवार शाम को एक वीडियो संदेश में, नेपाली सेना के प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने प्रदर्शनकारी पक्षों से विरोध गतिविधियों को स्थगित करने और शांति के लिए संवाद का रास्ता अपनाने का आग्रह किया. उन्होंने हाल के प्रदर्शनों में हुई जानमाल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त किया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की.
“वर्तमान चुनौतीपूर्ण स्थिति को सामान्य करना और राष्ट्र के सर्वोच्च हितों की रक्षा करना हम सभी का साझा कर्तव्य है. मैं सभी पक्षों से अनुरोध करता हूं कि वे विरोध गतिविधियों को स्थगित करें और संवाद व शांति के मार्ग को अपनाएं,” जनरल सिग्देल ने कहा.
उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और राष्ट्रीय एकता, शांति, और सुरक्षा को बनाए रखने को सभी नेपाली नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी बताया. उन्होंने जोर देकर कहा कि नेपाली सेना देश की स्वतंत्रता, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रही है. साथ ही, उन्होंने प्रदर्शनकारियों से राष्ट्रीय और ऐतिहासिक धरोहरों, सार्वजनिक और निजी संपत्ति, और राजनयिक मिशनों की सुरक्षा को नुकसान न पहुंचाने की अपील की.
पशुपतिनाथ मंदिर पर हमला, सेना तैनात
मंगलवार देर रात पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा और आगजनी की घटनाओं के बाद नेपाली सेना की एक टुकड़ी को मंदिर की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया. नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बस्नेत ने बताया कि सेना की एक टीम मंदिर की सुरक्षा के लिए तत्काल पहुंच गई है.
हालांकि, जनरेशन-जेड आंदोलन के नेताओं ने दावा किया कि मंदिर में हिंसा उनकी योजना का हिस्सा नहीं था. एक प्रदर्शनकारी नेता ने कहा, “रात में इतनी आगजनी करना हमारा इरादा नहीं था. हमारी मांगों के अनुसार स्थिति आगे बढ़ रही थी, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने मंदिर पर हमला किया.” नेताओं ने राष्ट्रपति द्वारा बुलाए गए संवाद में शामिल होने की सहमति जताई और लोगों से सरकारी संपत्ति पर आगजनी न करने की अपील की.
सेना का कड़ा रुख: लूटपाट और हिंसा पर चेतावनी
नेपाली सेना के जनसंपर्क और सूचना निदेशालय (डीपीआरएंडआई) ने मंगलवार रात एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर लूटपाट, आगजनी, और अन्य विघटनकारी गतिविधियों को तत्काल रोकने की मांग की. बयान में चेतावनी दी गई कि यदि ऐसी गतिविधियां जारी रहीं, तो रात 10 बजे से सेना सहित सभी सुरक्षा तंत्र पूरी तरह तैनात किए जाएंगे.
सेना ने कुछ समूहों पर अस्थिर स्थिति का फायदा उठाकर नागरिकों और सार्वजनिक संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और देश भर के नागरिकों से अशांति को नियंत्रित करने में सहयोग करने की अपील की. निदेशालय ने कहा, “सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की जाएगी, और आगे की जानकारी उचित समय पर दी जाएगी.”
जनरेशन-जेड की मांगें और भविष्य
जनरेशन-जेड प्रदर्शनकारी व्यवस्थागत सुधारों और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं. हालांकि, हिंसा और तोड़फोड़ की हाल की घटनाओं ने स्थिति को और जटिल कर दिया है. नेताओं ने संवाद के लिए तत्परता दिखाई है, लेकिन जनता के बीच असंतोष और अशांति बनी हुई है.
राष्ट्रपति और सेना की अपीलों ने शांति और संवाद की उम्मीद जगाई है, लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या सभी पक्ष बातचीत की मेज पर आएंगे और नेपाल में स्थिरता बहाल होगी.