पीएम मोदी ने दी 'भयमुक्त बंगाल' की गारंटी
कोलकाता । डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया. अपने करीब 50 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखे हमले किए और बंगाल की अस्मिता, सुरक्षा और विकास को लेकर 'मोदी की गारंटी' का दांव चला.
प्रधानमंत्री ने करीब 18,680 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आगामी चुनाव केवल सरकार बदलने के लिए नहीं, बल्कि बंगाल की आत्मा को बचाने के लिए हैं.
उन्होंने राज्य में बदलती जनसांख्यिकी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि घुसपैठ के कारण कई क्षेत्रों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं और तृणमूल कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के चलते हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने का विरोध कर रही है.
प्रधानमंत्री ने संदेशखालि और आरजी कर अस्पताल की घटनाओं का जिक्र करते हुए महिला सुरक्षा के मुद्दे पर ममता बनर्जी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि बंगाल में अपराधियों को संरक्षण दिया जाता है और माताओं-बहनों को सूरज ढलने से पहले घर लौटने की सलाह दी जाती है.
मोदी ने वादा किया कि भाजपा की सरकार आते ही यह स्थिति बदलेगी और अपराधी कानून के शिकंजे में होंगे.
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रहार करते हुए पीएम ने कहा कि बंगाल में 'जंगलराज' व्याप्त है और बिना 'कट-मनी' के केंद्र की योजनाओं का लाभ गरीबों तक नहीं पहुंचने दिया जाता.
उन्होंने युवाओं के पलायन और नौकरियों की 'खुलेआम बिक्री' पर दुख जताते हुए कहा कि तृणमूल ने बंगाल के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है. पीएम ने जोर देकर कहा कि अब बंगाल के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी, यह उनकी गारंटी है.
चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के बीच, मोदी ने उन 60 लाख मतदाताओं का मुद्दा भी उठाया जो अपने मताधिकार को लेकर अनिश्चित हैं.
उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस हार के डर से चुनाव आयोग और सेना जैसे संवैधानिक संस्थानों पर सवाल उठाती है.
प्रधानमंत्री ने बंगाल में व्याप्त 'भय के वातावरण' पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग डरा-धमका कर सत्ता में बने रहना चाहते हैं, उनकी विदाई का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. अपने भाषण की शुरुआत और अंत बांग्ला भाषा में करते हुए मोदी ने बंगाल की जनता से भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश की और आश्वासन दिया कि राज्य में अब कानून का शासन स्थापित होगा.