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$1 बिलियन दें और पाएं ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की स्थायी सदस्यता

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18 जन. 2026, 07:25 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप

वॉशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा शांति समिति में शामिल होने वाले देशों से 1 बिलियन डॉलर सदस्यता शुल्क देने की बात कही है. ब्लूमबर्ग न्यूज की एक हालिया रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिसमें दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा के प्रस्तावित 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) के ड्राफ्ट चार्टर में सदस्य देशों से 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,500 करोड़ रुपये) के योगदान की बात कही गई है. 


रिपोर्ट के अनुसार, जो देश चार्टर लागू होने के पहले वर्ष के भीतर 1 बिलियन डॉलर की नकद राशि का योगदान करेंगे, उन्हें तीन साल की समय सीमा से छूट देते हुए स्थायी सदस्यता दी जा सकती है. 

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अन्य देशों के लिए सदस्यता का कार्यकाल केवल तीन वर्ष का होगा, जिसे अध्यक्ष की अनुमति से ही आगे बढ़ाया जा सकेगा. इस बोर्ड का उद्देश्य संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में स्थिरता लाना और कानून के शासन को बहाल करना बताया गया है.


हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन खबरों को "भ्रामक" करार देते हुए स्पष्ट किया है कि 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम सदस्यता शुल्क अनिवार्य नहीं है. 


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जारी एक बयान में व्हाइट हाउस ने कहा कि यह वित्तीय प्रावधान केवल उन सहयोगी देशों को स्थायी सदस्यता का विकल्प देता है जो शांति और सुरक्षा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करना चाहते हैं. 


ट्रंप ने इस बोर्ड के तहत गाजा के लिए एक विशेष शांति बोर्ड बनाने हेतु अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और कनाडा के मार्क कार्नी जैसे वैश्विक नेताओं को भी आमंत्रित किया है. 


फिलहाल, कई यूरोपीय देशों ने इस प्रस्ताव पर यह कहते हुए चिंता जताई है कि फंड पर व्यक्तिगत नियंत्रण की शर्तें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं हैं.


गौरतलब है कि 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित एक अंतरराष्ट्रीय संगठन और प्रशासनिक निकाय है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों (विशेषकर गाजा) में स्थिरता, पुनर्निर्माण और शांति स्थापित करना है.

इसकी मुख्य विशेषताएं


नेतृत्व और संरचना: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसके संस्थापक अध्यक्ष हैं. इसमें एक 'कार्यकारी बोर्ड' भी शामिल है जिसमें अजय बंगा (विश्व बैंक प्रमुख), टोनी ब्लेयर (पूर्व ब्रिटिश पीएम), और जारेड कुशनर जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल हैं.


गाजा पर ध्यान: वर्तमान में इसका मुख्य ध्यान गाजा के पुनर्निर्माण और शासन पर है. इसके तहत एक 'गाजा कार्यकारी बोर्ड' बनाया गया है जो वहां निवेश, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा (इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स के माध्यम से) की निगरानी करेगा.


विस्तृत दृष्टिकोण: हालांकि इसकी शुरुआत गाजा से हुई है, लेकिन ट्रंप का लक्ष्य इसे संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक विकल्प या पूरक के रूप में विकसित करना है, जो दुनिया के अन्य संघर्षों को भी हल कर सके.


सदस्यता और वित्त: इसके ड्राफ्ट चार्टर के अनुसार, सदस्य देशों के लिए 3 साल का कार्यकाल होगा. $1 बिलियन का योगदान देने वाले देशों को 'स्थायी सदस्यता' का विकल्प मिल सकता है, हालांकि व्हाइट हाउस ने इसे अनिवार्य शुल्क मानने से इनकार किया है.


विवाद: कुछ देश और विशेषज्ञ इसे अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ और ट्रंप के व्यक्तिगत नियंत्रण वाला संगठन मानकर इसकी आलोचना कर रहे हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP