पासपोर्ट, आधार और वोटर आईडी नहीं हैं नागरिकता का सबूत
नई दिल्ली । डेस्क: भारत में नागरिकता की पहचान को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है. विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर स्पष्ट किया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज (ट्रेवल डॉक्यूमेंट) है और इसे नागरिकता के पक्के सबूत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. अधिकारी के मुताबिक, पासपोर्ट विदेशों में भारतीयों की राष्ट्रीयता को तो प्रमाणित करता है, लेकिन यह नागरिकता का अंतिम कानूनी दस्तावेज नहीं है.
इस बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है. लोग हैरान होकर पूछ रहे हैं कि अगर पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे बुनियादी दस्तावेज भी नागरिकता का अकाट्य सबूत नहीं हैं, तो फिर देश में नागरिकता साबित करने के लिए किस दस्तावेज की जरूरत होगी?
कुछ यूजर्स ने पासपोर्ट की तस्वीर साझा करते हुए सवाल उठाया कि जब इस पर राष्ट्रीयता 'भारतीय' लिखी होती है, तो इसे नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं माना जा रहा?
विदेश मंत्रालय का यह रुख देश की अदालतों द्वारा पहले दिए गए फैसलों के अनुरूप ही है. अगस्त 2025 में एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड का इस्तेमाल केवल पहचान के प्रमाण (प्रूफ ऑफ आइडेंटिटी) के रूप में किया जा सकता है, नागरिकता के साक्ष्य के रूप में नहीं.
नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेजों को लेकर आम जनता में अभी भी असमंजस की स्थिति है.
हालांकि, सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (PIB) ने पहले एक स्पष्टीकरण में कहा था कि नागरिकता को जन्म तिथि और जन्म स्थान से जुड़े दस्तावेजों को जमा करके साबित किया जा सकता है, लेकिन राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) जैसे मामलों के लिए पूरी तरह से स्वीकार्य दस्तावेजों की अंतिम सूची पर अभी फैसला होना बाकी है.