संसदीय पैनल का आदेश: दवाओं की कीमत कम करो
नई दिल्ली । डेस्क: संसदीय रसायन और उर्वरक पैनल ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग (DoP) से एक नई फार्मास्यूटिकल नीति लाने के लिए तत्काल कदम उठाने की सिफारिश की है. इस नीति का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित (scheduled) और गैर-अनुसूचित (non-scheduled) दोनों तरह के फॉर्मूलेशन को लोगों को किफायती कीमतों पर उपलब्ध कराना है.
दवाओं की बढ़ती कीमतों की समीक्षा करते हुए, समिति ने पाया कि आवश्यक दवाओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे वे आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं. पैनल ने जोर दिया कि विभाग को जल्द से जल्द एक ऐसी नीति के साथ आना चाहिए जो जनता को सस्ती दवाएं सुनिश्चित करे.
समिति ने यह भी नोट किया कि ट्रेड मार्जिन रैशनलाइज़ेशन का मुद्दा लंबे समय से विभाग के विचाराधीन है, लेकिन इस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. इस देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए, पैनल ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग और राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) को ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत ट्रेड मार्जिन रैशनलाइज़ेशन दृष्टिकोण को लागू करने के लिए जल्द से जल्द एक नीति लाने का निर्देश दिया है.
पैनल का मानना है कि बहुराष्ट्रीय फार्मा कंपनियों पर अधिक नियंत्रण की आवश्यकता है. समिति ने सिफारिश की है कि एक ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे लोगों को प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत प्रचलित प्राइस टू स्टॉकस्ट पर दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें. समिति ने इस संबंध में उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने को कहा है.
फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने समिति को बताया कि उसने DPCO, 2013 के विभिन्न प्रावधानों पर हितधारकों के साथ परामर्श किया है और सुझावों की जांच की जा रही है. हालाँकि, पैनल ने त्वरित कार्रवाई की मांग की है ताकि आम नागरिकों के लिए दवाओं की उपलब्धता और सामर्थ्य सुनिश्चित हो सके.