संसदीय समिति ने मेडिकल उपकरणों पर भी मूल्य नियंत्रण की सिफारिश की
नई दिल्ली । डेस्क: संसदीय समिति (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण) ने आम जनता को राहत देने के लिए एक बड़ी सिफारिश की है. समिति ने सरकार से कहा है कि पेसमेकर, आंखों के लेंस और इंप्लांटेबल पंप जैसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों को भी ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) की लिस्ट में शामिल किया जाए, ताकि इनकी कीमतें नियंत्रित की जा सकें. इसके लिये इन उपकरणों को आवश्य दवाओं की राष्ट्रीय सूची (NLEM) में शामिल किया जाए.
प्रो. राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी 176वीं रिपोर्ट में कहा है कि पहले भी कोरोनरी स्टेंट और नी-इम्प्लांट (घुटने के ट्रांसप्लांट) जैसी चीजों के दाम तय करने से करोड़ों लोगों को इलाज के भारी खर्च से बड़ी राहत मिली है.
अकेले स्टेंट की कीमतें तय होने से मरीजों के हर साल करीब 13,353 करोड़ रुपये बचे हैं. ऐसे में बदलती बीमारियों और आधुनिक इलाज को देखते हुए DPCO लिस्ट का दायरा बढ़ाना बेहद जरूरी है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कैंसर की 42 गैर-अनुसूचित दवाओं और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, पल्स ऑक्सीमीटर जैसे जरूरी मेडिकल उपकरणों पर 'ट्रेड मार्जिन' यानी मुनाफे की सीमा 30% से 70% तक तय करने से ग्राहकों को सालाना 1,984 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हुई है.
समिति ने सिफारिश की है कि इस ट्रेड मार्जिन कंट्रोल को एक परमानेंट कानून का रूप दिया जाए ताकि कंपनियां या डिस्ट्रीब्यूटर मरीजों से मनमाना मुनाफा न वसूल सकें.
हालांकि, समिति ने यह भी ध्यान रखा है कि छोटे और सूक्ष्म उद्योगों (MSME) को इससे नुकसान न पहुंचे. इसलिए उन्होंने छोटे निर्माताओं के लिए एक संतुलित मार्जिन तय करने की सलाह दी है. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि दवा कंपनियों और उद्योगों की चिंताओं को सुनना जरूरी है, लेकिन आम आदमी तक सस्ती दवाएं और इलाज पहुंचाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.