फिलिस्तीन को मान्यता: इजरायल के 'दोस्त' क्यों हो रहे दुश्मन?
नई दिल्ली । डेस्क: गाजा में इजरायली हमलों और 'नरसंहार' के आरोपों के बीच पश्चिमी देशों ने अचानक फिलिस्तीन को राज्य मान्यता दे दी है. ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों ने सितंबर 2025 में यह कदम उठाया, जिससे इजरायल अंतर्राष्ट्रीय रूप से अलग-थलग पड़ गया. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ मानवाधिकार का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ नापाक चाल भी है.
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल (जनवरी 2025 से) में यूरोपीय देशों के साथ तनाव चरम पर है. अप्रैल 2025 में ट्रंप ने 'पारस्परिक शुल्क' नीति लागू कर पश्चिमी यूरोप के उत्पादों पर भारी कर लगाए, जिससे ब्रिटेन-फ्रांस जैसे देशों को व्यापारिक नुकसान हुआ. शरणार्थी नीति में भी कठोरता बरती, हजारों अवैध प्रवासियों को हथकड़ी लगाकर विमानों से देश भेजा, जिसकी वैश्विक निंदा हुई.
ट्रंप का तर्क: मुस्लिम शरणार्थी यूरोप-अमेरिका की अर्थव्यवस्था व संस्कृति को नुकसान पहुंचा रहे हैं. लेकिन यूरोपीय देशों में मुस्लिम शरणार्थी वोट बैंक हैं, इसलिए घरेलू राजनीति के लिए फिलिस्तीन समर्थन बढ़ा.
कनाडा पर ट्रंप का दबाव अत्यधिक था: नवंबर 2024 चुनाव के बाद उन्होंने कनाडा को '51वें राज्य' बनाने की धमकी दी और उसके उत्पादों पर शुल्क लगाए, जिससे पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो को इस्तीफा देना पड़ा. नए पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी 'आक्रामण' का विरोध किया. इसी तरह, ट्रंप ने ग्रीनलैंड (डेनमार्क के अधीन) खरीदने की इच्छा जताई, जो यूरोप को साम्राज्यवादी लगा.
नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) में भी फूट: ट्रंप ने सदस्य देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने को कहा, अमेरिका को 'सबकी सुरक्षा' न देने की धमकी दी. रूस के आक्रमण के डर से यूरोपीय देश डरे हुए हैं. फरवरी 2022 से यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी यूरोप ने रूस पर 16,000 से अधिक प्रतिबंध लगाए, लेकिन ऊर्जा संकट में अरब देशों से महंगे तेल खरीदने पड़े. फलस्वरूप, अरब समर्थन के लिए फिलिस्तीन मान्यता दी, ताकि तेल दाम सस्ते हों.
गाजा संकट ने आग में घी डाला: 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल ने हवाई हमले, जमीनी अभियान चलाए, सहायता रोकी-परिणामस्वरूप भुखमरी जैसी स्थिति. मानवाधिकार संगठनों ने 'नरसंहार' का आरोप लगाया. हमास को कुचलने के नाम पर इजरायल ने लेबनान के हिजबुल्लाह और ईरान के तेल अवीव पर हमलों का जवाब दिया; फ्रांस ने हथियार बंद किए, तो इजरायली हवाई हमले में बेरूत की फ्रांसीसी तेल कंपनी को नुकसान.
यह पहली बार नहीं: स्पेन (2024), नॉर्वे, आयरलैंड, बारबाडोस, त्रिनिदाद-टोबैगो, जमैका, बहामास पहले मान्यता दे चुके. 1948 में इजरायल के जन्म से विवाद चला आ रहा; दो-राष्ट्र सिद्धांत (तेल अवीव समर्थक) को अरब-अपनाने वाले अस्वीकार. पिछले 77 वर्षों में कई युद्ध हुए, पश्चिम हमेशा इजरायल के साथ. अब दो-राष्ट्र समाधान के लिए फिलिस्तीन को मान्यता.
ट्रंप-UN भाषण (23 सितंबर 2025) में पश्चिमी देशों पर निशाना साधा: 'शरणार्थी समस्या पर नर्क की ओर बढ़ रहे हो', फिलिस्तीन मान्यता को 'हमास को इनाम' बताया. वे इजरायल का पूरा समर्थन, गाजा में इस्लामी देशों (तुर्की, पाकिस्तान) की सेना तैनाती का सुझाव दे रहे, लेकिन नेतन्याहू की 'महान इजरायल' योजना (गाजा दखल) जारी है.