पाकिस्तान: आम जनता बदहाल, एलीट क्लास का विदेश पलायन और सेना का दबदबा
पाकिस्तान में गहराते आर्थिक संकट के बीच आम नागरिक पलायन करने को मजबूर हैं, जबकि देश के शक्तिशाली नेता और अधिकारी अपने लिए विदेश में सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे हैं. सैन्य नियंत्रण और भ्रष्टाचार की वजह से देश की संस्थाएं लगातार कमजोर हो रही हैं.
नई दिल्ली । डेस्क: पाकिस्तान इस समय गहरे आर्थिक संकट और राजनीतिक अव्यवस्था से जूझ रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक देश का आम नागरिक बढ़ती महंगाई और बदहाली से हताश है, वहीं सत्ता पर काबिज एलीट वर्ग और अधिकारी विदेश भागने की तैयारी कर रहे हैं. सेंटर फॉर पीस स्टडीज के एसोसिएट रिसर्च फेलो इमरान खुर्शीद की रिपोर्ट के अनुसार, इस पलायन के पीछे भ्रष्टाचार, सैन्य प्रभुत्व और राजनीतिक कुशासन मुख्य वजहें हैं, जिसने सरकारी संस्थानों को कमजोर कर दिया है.
संसद में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि साल 2026 की पहली छमाही में ही 3,17,000 से अधिक पाकिस्तानी रोजगार की तलाश में देश छोड़ चुके हैं, जबकि 2024 से 2026 के बीच 18.7 लाख से ज्यादा नागरिकों ने पलायन किया.
अक्टूबर में आई ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक 2,500 से अधिक सक्रिय संघीय अधिकारियों के पास दोहरी नागरिकता है और कई वरिष्ठ नौकरशाहों ने अपनी विदेशी संपत्तियों को छुपाया है.
पुर्तगाल की रेजिडेंसी-बाय-इन्वेस्टमेंट योजना एलीट वर्ग की पहली पसंद बनी हुई है. इस पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी सवाल उठाए कि सरकारी सेवा में रहते हुए अधिकारियों ने एक योजना के तहत यह तैयारी की, जो उनकी निष्ठा पर सवाल खड़ा करती है.
इसके अलावा, 19 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान की सीनेट ने पासपोर्ट (संशोधन) विधेयक पारित किया, जिसके तहत पूर्व सांसदों और सीनेटरों को जीवनभर के लिए मुफ्त आधिकारिक ब्लू पासपोर्ट रखने का अधिकार दे दिया गया.
रिपोर्ट में सेना की भूमिका पर भी तीखा हमला किया गया है. खुर्शीद के अनुसार, जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में सेना स्पेशल इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन काउंसिल (SIFC) और फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) के जरिए खैबर पख्तूनख्वा के दुर्लभ खनिजों का तेजी से दोहन कर रही है, जिसका फायदा स्थानीय जनता के बजाय चुनिंदा लोगों तक सीमित है और इलाके में पर्यावरणीय नुकसान बढ़ रहा है.