मोबाईल में 'ऑलवेज ऑन' सैटेलाइट ट्रैकिंग की मांग का विरोध
नई दिल्ली । डेस्क: भारत सरकार एक ऐसे दूरसंचार उद्योग प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है जो स्मार्टफोन कंपनियों को बेहतर निगरानी के लिए हमेशा सक्रिय रहने वाली सैटेलाइट लोकेशन ट्रैकिंग (स्थान ट्रैकिंग) को सक्षम करने के लिए मजबूर करेगा. दस्तावेजों, ईमेल और सूत्रों के अनुसार, निजता की चिंताओं के कारण Apple, Google और Samsung इस कदम का विरोध कर रहे हैं.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को सभी उपकरणों पर एक राज्य-संचालित साइबर सुरक्षा ऐप को प्रीलोड करने के आदेश को कार्यकर्ताओं और राजनेताओं द्वारा संभावित जासूसी की चिंताओं के बाद वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था, जिससे देश में निजता पर एक तीखी बहस छिड़ गई थी.
मोदी प्रशासन लंबे समय से इस बात से चिंतित है कि जांच के दौरान कानूनी अनुरोध किए जाने पर उसकी एजेंसियों को दूरसंचार कंपनियों से सटीक स्थान की जानकारी नहीं मिल पाती है. मौजूदा प्रणाली के तहत, कंपनियां सेलुलर टॉवर डेटा के उपयोग तक सीमित हैं जो केवल एक अनुमानित क्षेत्र स्थान प्रदान करता है, जो कई मीटर तक गलत हो सकता है.
जून के एक आंतरिक संघीय आईटी मंत्रालय के ईमेल के अनुसार, Reliance की Jio और Bharti Airtel का प्रतिनिधित्व करने वाले सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने प्रस्तावित किया है कि सटीक उपयोगकर्ता स्थान तभी प्रदान किए जाने चाहिए जब सरकार स्मार्टफोन निर्माताओं को A-GPS तकनीक जो सैटेलाइट सिग्नल और सेलुलर डेटा का उपयोग करती है को सक्रिय करने का आदेश दे.
इसके लिए स्मार्टफोन में लोकेशन सेवाओं को हमेशा सक्रिय रखना होगा और उपयोगकर्ताओं के पास उन्हें निष्क्रिय करने का कोई विकल्प नहीं होगा. इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि Apple, Samsung, और Alphabet के Google ने नई दिल्ली से कहा है कि ऐसा अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए.
रॉयटर्स द्वारा देखे गए सरकार को लिखे एक गोपनीय जुलाई पत्र में, लॉबिंग समूह इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) जो Apple और Google दोनों का प्रतिनिधित्व करता है ने लिखा है कि डिवाइस-स्तर के स्थान को ट्रैक करने के उपाय का दुनिया में कहीं और कोई उदाहरण नहीं है. ICEA ने चेतावनी दी कि प्रस्तावित स्थान ट्रैकिंग से सैन्य, न्यायाधीशों, कॉर्पोरेट अधिकारियों और पत्रकारों सहित उनके उपयोगकर्ता आधार की सुरक्षा को खतरा हो सकता है.
दूरसंचार समूह ने यह भी आग्रह किया है कि सरकार फोन निर्माताओं को पॉप-अप सुविधाओं को निष्क्रिय करने का आदेश दे, जो उपयोगकर्ताओं को यह बताते हुए अलर्ट करती हैं कि उनका "कैरियर आपके स्थान तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है." हालांकि, Apple और Google के समूह ने सरकार को लिखे अपने जुलाई पत्र में तर्क दिया कि निजता की चिंताओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और पारदर्शिता और उपयोगकर्ता नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए पॉप-अप को निष्क्रिय करने पर भी विचार नहीं किया जाना चाहिए.
ब्रिटेन के इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से जुड़े एक डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ जुनाडे अली ने कहा, "यह प्रस्ताव देखेगा कि फोन एक समर्पित निगरानी उपकरण के रूप में कार्य करते हैं."
फिलहाल, आईटी या गृह मंत्रालय द्वारा कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया गया है. गृह मंत्रालय ने इस मामले पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को शीर्ष स्मार्टफोन उद्योग के अधिकारियों की एक बैठक निर्धारित की थी, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया.