छत्तीसगढ़ की 1 तिहाई आबादी निरक्षर
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में आगामी 2027 की जनगणना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इस बीच आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के अनुमानित आंकड़ों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है. रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की कुल आबादी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा यानी 1.04 करोड़ से अधिक लोग आज भी निरक्षर हैं.
मार्च 2027 के अनुमानों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या लगभग 3,15,12,600 तक पहुँचने की उम्मीद है. इसमें से साक्षर आबादी 2,10,60,921 रहने का अनुमान है, जबकि 1,04,51,679 लोग ऐसे हैं जो लिखना-पढ़ना नहीं जानते. शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के लिए इस बड़ी खाई को पाटना आने वाले समय में एक गंभीर चुनौती साबित होगा.
आंकड़ों में लैंगिक असमानता भी साफ नजर आ रही है. जहाँ राज्य में पुरुषों की साक्षरता दर 83.01% के साथ मजबूत स्थिति में है, वहीं महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 68.16% पर सिमटी हुई है.
इसके अलावा, राज्य की राजधानी रायपुर में एक अनोखा विरोधाभास देखने को मिला है. रायपुर 86.46% के साथ राज्य में सबसे अधिक साक्षरता दर वाला जिला तो है, लेकिन घनी आबादी के कारण राज्य में सबसे अधिक (6,75,311) निरक्षर लोग भी इसी जिले में रहते हैं.
वरिष्ठ शिक्षाविद् और सरकारी सलाहकार डॉ. जवाहर सूरीशेट्टी ने इस स्थिति को 'विकास कालीन आपातकाल' (डेवलपमेंट इमरजेंसी) करार दिया है. उनका कहना है कि आज के दौर में निरक्षरता का मतलब सिर्फ पढ़ना-लिखना न आना नहीं है, बल्कि इसका सीधा अर्थ अवसरों, तकनीक, स्वास्थ्य सेवाओं और वित्तीय लाभों से वंचित हो जाना है.
इस अंतर को कम करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने सितंबर 2024 में एक विशेष साक्षरता परियोजना शुरू की थी, जिसके तहत राज्य साक्षरता मिशन के लगभग एक लाख स्वयंसेवी शिक्षकों के माध्यम से 10 लाख निरक्षर लोगों को बुनियादी साक्षरता सिखाने का लक्ष्य रखा गया है.
इसके साथ ही केंद्र सरकार के 'उल्लास' (न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम) के तहत भी वयस्क साक्षरता को लेकर आक्रामक अभियान चलाया जा रहा है. हालांकि, बस्तर संभाग के माओवाद प्रभावित जिलों में भौगोलिक विषमताओं और लंबे समय से जारी उथल-पुथल के कारण साक्षरता के लक्ष्यों को हासिल करना अब भी एक कठिन काम बना हुआ है.