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महाराष्ट्र के पालघर में केमिकल फैक्ट्री से ओलियम गैस का रिसाव

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03 मार्च 2026, 05:25 AM 3 मिनट में पढ़ें 4

ओलियम गैस रिसाव- पालघर
ओलियम गैस रिसाव- पालघर

पालघर । डेस्क: महाराष्ट्र के पालघर जिले के बोइसर एमआईडीसी स्थित 'भगेरिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड' की एक इकाई में सोमवार दोपहर करीब 2 बजे ओलियम गैस (फ्यूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड) के रिसाव से हड़कंप मच गया. इस घटना के बाद एहतियात के तौर पर तारापुर विद्यामंदिर के 1,600 छात्रों और आसपास की फैक्ट्रियों के 1,000 से अधिक श्रमिकों सहित कुल 2,600 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया. 


अधिकारियों के अनुसार, 2,500 लीटर के ओलियम टैंक से हुए रिसाव के कारण सफेद धुएं का घना बादल बन गया, जो तेज हवाओं के चलते 5 किलोमीटर के दायरे में फैल गया.

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हादसे की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने आपदा प्रबंधन योजना को सक्रिय किया. एनडीआरएफ (NDRF), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और दमकल विभाग की टीमों ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को संभाला. धुएं की सघनता अधिक होने के कारण शुरुआती दौर में टीम को टैंक तक पहुँचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन बाद में विशेषज्ञों ने 'सेल्फ-कंटेन्ड ब्रीदिंग अपैरेटस' (SCBA) पहनकर टैंक का पता लगाया और रेत की बोरियों की मदद से धुएं को नियंत्रित किया. 


इस घटना में तीन लोगों ने आँखों में जलन की शिकायत की, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया, हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है. पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख और जिला कलेक्टर ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और घरों के भीतर रहने की अपील की है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन लगातार निगरानी रख रहा है.


गौरतलब है कि ओलियम गैस वास्तव में सल्फ्यूरिक एसिड का एक अत्यंत सांद्रित रूप है, जिसे 'धूम्र सल्फ्यूरिक एसिड' (Fuming Sulfuric Acid) भी कहा जाता है. तकनीकी रूप से यह सल्फ्यूरिक एसिड में सल्फर ट्राइऑक्साइड का मिश्रण होता है. जब यह तरल पदार्थ हवा के संपर्क में आता है, तो इसमें मौजूद सल्फर ट्राइऑक्साइड वातावरण की नमी के साथ बहुत तेजी से प्रतिक्रिया करता है, जिससे सल्फ्यूरिक एसिड की सूक्ष्म बूंदों का एक घना सफेद धुआं या बादल बन जाता है. 


यही कारण है कि इसे सामान्य बोलचाल में 'ओलियम गैस' के रिसाव के रूप में जाना जाता है, जबकि यह मूल रूप से एक वाष्पशील तरल है. 


यह गैस मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक और संक्षारक होती है. इसके संपर्क में आने पर आंखों में तेज जलन, त्वचा पर गंभीर रासायनिक घाव और श्वसन मार्ग में सूजन हो सकती है. यदि कोई व्यक्ति इसके घने धुएं में सांस लेता है, तो यह फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है. 


औद्योगिक स्तर पर इसका उपयोग मुख्य रूप से रसायनों, विस्फोटकों और उर्वरकों के निर्माण में किया जाता है. इसके रिसाव को नियंत्रित करने के लिए पानी का उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि पानी के साथ यह अत्यधिक ऊष्मा और विस्फोटक प्रतिक्रिया करता है, इसीलिए इसे सोखने या दबाने के लिए रेत या अन्य शुष्क रसायनों का सहारा लिया जाता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP