"एक ग्राम संवर्धित यूरेनियम भी देश से बाहर नहीं जाएगा": ईरान का रुख
मध्य पूर्व में गहराते सैन्य तनाव और कूटनीतिक बैठकों के बीच ईरान ने अपनी संप्रभुता और परमाणु भंडार को लेकर रुख कड़ा कर लिया है. तेहरान का स्पष्ट संदेश है कि अमेरिकी दबाव के आगे कोई समर्पण नहीं होगा.
नई दिल्ली । डेस्क: मध्य पूर्व में जारी भीषण सैन्य संघर्ष और गहराते संकट के बीच कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे युद्ध को समाप्त करने तथा क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए विभिन्न देशों द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं. इसी क्रम में पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने तेहरान का दौरा किया और ईरानी नेतृत्व के साथ क्षेत्र में बढ़ते तनाव एवं यमन के हालातों पर चर्चा की. हालांकि, इस कूटनीतिक गतिविधि के बावजूद तेहरान ने अपना रुख बेहद सख्त बनाए रखा है. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका उसकी पूर्व शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तब तक युद्ध समाप्त नहीं होगा और न ही होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए खोला जाएगा.
परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख और डाउनब्लेंडिंग का विकल्प
ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेज़ाई ने मंगलवार देर रात पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख से मुलाकात के बाद देश के परमाणु रुख को रेखांकित किया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार से एक ग्राम भी बाहर भेजने के पक्ष में नहीं है. रेज़ाई ने परमाणु कार्यक्रम को देश की राष्ट्रीय संपत्ति और संप्रभु अधिकार करार दिया, जिसे कई वर्षों के हमलों, तोड़फोड़ और वैज्ञानिकों की हत्याओं के बावजूद हासिल किया गया है.
हालांकि, रेज़ाई ने यह संकेत जरूर दिया कि अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों की देखरेख में देश के भीतर ही अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के संवर्धन स्तर को कम (डाउनब्लेंडिंग) किया जा सकता है. ईरान का तर्क है कि सैन्य दबाव के सामने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से आत्मसमर्पण करना एक बड़ी नाकामी होगी, खासकर तब जब इस बात की कोई गारंटी न हो कि भविष्य में उस पर दोबारा हमले नहीं होंगे.
वाशिंगटन की मांगें और कूटनीतिक गतिरोध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प युद्ध की शुरुआत से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से नष्ट करने पर जोर देते रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में संकेत दिए थे कि यदि संवर्धन क्षमता में कोई सार्थक और बड़ी कटौती की जाती है तो वाशिंगटन को संतुष्ट किया जा सकता है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के अनुमानों के अनुसार, हमलों से पहले तेहरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित 440 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद था, जबकि परमाणु हथियार के लिए 90 प्रतिशत से अधिक संवर्धन की आवश्यकता होती है.
जून 2025 में इज़राइली और अमेरिकी हमलों के बाद से ईरान के कई प्रमुख परमाणु ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है. इसके बाद 2026 में हुए नए हमलों के कारण आईएईए के निरीक्षक सुविधाओं तक नहीं पहुंच पाए हैं, जिससे वर्तमान में यूरेनियम भंडार की सटीक स्थिति का आकलन कर पाना मुश्किल हो गया है. ईरान ने आईएईए पर पश्चिमी देशों के इशारों पर काम करने का आरोप लगाते हुए अपने परिसरों में निरीक्षण की अनुमति देने से इनकार कर दिया है.
क्षेत्रीय कूटनीति और युद्ध के गहराते बादल
तेहरान में कूटनीतिक दौर लगातार जारी है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी हाल ही में तेहरान का दौरा कर वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के साथ परामर्श किया. इसके अलावा कई अरब देशों के प्रतिनिधियों के भी तेहरान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं. दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इज़राइली सुरक्षा अधिकारियों से मुलाकात की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सैन्य रणनीतियों को और धार दी जा रही है.
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि देश वास्तविक युद्ध स्थितियों का सामना कर रहा है और अभी शांति की संभावनाएं दूर हैं. संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कलीबाफ ने दोहराया कि अमेरिका को सबसे पहले सुरक्षा ब्लॉक हटाने, तेल प्रतिबंधों में छूट देने और संपत्ति अनफ्रीज करने जैसी शर्तों को पूरा करना होगा. पेंटागन द्वारा नए विमानवाहक पोत और मरीन यूनिट को मध्य पूर्व भेजे जाने की खबरों के बीच क्षेत्र में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव का खतरा मंडरा रहा है.