ट्रम्प और नेतन्याहू के तीखे तेवरों के बीच ईरान की बहुस्तरीय युद्ध की तैयारी
अमेरिका और इजराइल की ओर से मिल रही सैन्य धमकियों के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी दुस्साहस का जवाब बिना किसी सीमा के दिया जाएगा. मध्य पूर्व में बनते इस तनावपूर्ण हालात और राजनीतिक गतिविधियों पर एक नजर.
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव के बादल मंडराने लगे हैं. प्रेस टीवी को दिए एक बयान में ईरान के शीर्ष सूत्र ने स्पष्ट किया है कि देश ने एक व्यापक, बहुस्तरीय और सर्वव्यापी युद्ध के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं. तेहरान का रुख बिल्कुल साफ है कि यदि उसके खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामकता, हत्या या आतंकवादी कार्रवाई होती है, तो वह बिना किसी सीमा या संयम के कड़ा जवाब देगा. ईरान ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में हमलावरों और उनके समर्थकों के तमाम सुलभ ठिकानों को पूरी ताकत के साथ निशाना बनाया जाएगा.
अमेरिका और इजराइल की संयुक्त रणनीति
ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अमेरिका और इजराइल एक-दूसरे के सहयोग के बिना सैन्य कदम नहीं उठा सकते. तेहरान के अनुसार, दोनों देशों की स्वतंत्रता की बातें एक छलावा मात्र हैं. वाशिंगटन और तेल अवीव की ओर से आ रहे कड़े बयानों ने ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक रक्षात्मक कदम उठाने का कानूनी और नैतिक आधार प्रदान कर दिया है.
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपने एक संदेश में ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा कि यदि उसने अपना रवैया तेजी से नहीं बदला, तो अमेरिकी प्रशासन जल्द ही सैन्य और आर्थिक रूप से कमजोर हो चुके ईरान के खिलाफ इस काम को पूरा कर देगा. इसके साथ ही ट्रंप ने इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है.
इजराइली चुनाव और सैन्य हलचल
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अपना रुख कड़ा रखा है. उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश जारी किए हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक के शासन को खत्म करना उनका मुख्य उद्देश्य है. अपनी नई सुरक्षा नीति प्रस्तुत करते हुए नेतन्याहू ने साफ किया कि इजराइल को किसी भी कदम के लिए अमेरिकी स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है और आवश्यकता पड़ने पर वह स्वतंत्र रूप से पहल करने के लिए तैयार है.
राजनीतिक बयानों के बीच सीमा पर सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं. अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने हाल ही में इजराइल का औचक दौरा कर ओवदा एयर बेस पर नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज से क्षेत्रीय खतरों और सैन्य सहयोग पर चर्चा की. वहीं, इजराइली सेना ने आगामी मतदान से पहले अपने सैनिकों की छुट्टियां रद्द कर बल को हाई अलर्ट पर रखा है.
कूटनीति बनाम सैन्य टकराव
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वाशिंगटन के साथ पिछली वार्ताओं की विफलता पर निराशा व्यक्त की है. उनका कहना है कि वाशिंगटन ने लगातार समझौतों का उल्लंघन किया है, जिससे अमरीकी प्रतिबद्धताओं पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है.
वैश्विक बाजारों पर इस तनाव का बुरा असर दिख रहा है. फारस की खाड़ी में तेल टैंकरों पर हुए हादसों के बाद कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. अब सभी की निगाहें अमेरिकी रुख पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में कूटनीतिक रास्ते खुलते हैं या क्षेत्र एक और बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता है.