'नार्थ कोरिया ऑफ अफ्रीका' जहां इंटरनेट दुर्लभ है
नई दिल्ली । डेस्क: ‘नार्थ कोरिया ऑफ अफ्रीका’ के नाम से कुख्यात इरिट्रिया में सरकारी नियंत्रण की कड़ाई नॉर्थ कोरिया के समान है, और यह देश डिजिटल दुनिया से लगभग पूरी तरह कटा हुआ है. आज की वैश्विक डिजिटल क्रांति में, जहां इंटरनेट संचार, मनोरंजन, शिक्षा और दैनिक वित्तीय लेनदेन का आधार है, इरिट्रिया के नागरिकों को मोबाइल डेटा, ब्रॉडबैंड, सोशल मीडिया और यहाँ तक कि एटीएम जैसी सुविधाओं तक पहुंच नहीं है. आइए जानते हैं कि इरिट्रिया में इंटरनेट की इतनी कमी क्यों है, सरकार की सख्त नीतियां इसके पीछे क्या हैं, और इसका वहां के लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ रहा है.
इरिट्रिया में इंटरनेट की कमी
हॉर्न ऑफ अफ्रीका में बसा इरिट्रिया, जिबूती, सूडान और इथियोपिया की सीमाओं से घिरा हुआ है, और इसकी राजधानी अस्मारा रेड सागर के निकट है. विश्व में तकनीकी प्रगति के बावजूद, इरिट्रिया के नागरिकों को मोबाइल इंटरनेट या होम ब्रॉडबैंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है. रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल 1% आबादी ने कभी इंटरनेट का उपयोग किया है, और वह भी मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में बिखरे हुए कुछ इंटरनेट कैफे के माध्यम से. इन कैफे में कनेक्शन की गति इतनी धीमी है, अक्सर 2G से भी कम, कि इंटरनेट का उपयोग बेहद निराशाजनक और अविश्वसनीय हो जाता है.
सख्त सरकारी नियंत्रण और आर्थिक चुनौतियां
इरिट्रिया की तानाशाही सरकार नागरिकों के जीवन के हर पहलू को नियंत्रित करती है, जिसमें अनिवार्य सैन्य सेवा भी शामिल है, जो नागरिकों की स्वतंत्रता को सीमित करती है. राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक नियंत्रण के नाम पर सरकार दूरसंचार ढांचे और इंटरनेट पहुंच को कड़ाई से नियंत्रित करती है. नतीजतन, देश में मोबाइल डेटा नेटवर्क लगभग नहीं है, और इंटरनेट केवल कुछ महंगे इंटरनेट कैफे में ही उपलब्ध है.
आर्थिक रूप से भी इरिट्रिया कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. इंटरनेट कैफे में एक घंटे की पहुंच के लिए लगभग 100 इरिट्रियन नकफा (लगभग 100 रुपये) का खर्च आता है, जो कम आय वाले इस देश में अधिकांश लोगों के लिए एक बड़ी राशि है. इस कारण इंटरनेट आम लोगों के लिए एक विलासिता बन गया है, जिसे बहुत कम लोग वहन कर सकते हैं.
समाज और विकास पर प्रभाव
इंटरनेट की कमी का इरिट्रिया के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है. आज की दुनिया में इंटरनेट निम्नलिखित के लिए महत्वपूर्ण है:
शिक्षा: ऑनलाइन संसाधन, वर्चुअल लर्निंग और वैश्विक ज्ञान साझा करना इरिट्रिया के अधिकांश लोगों के लिए असंभव है.
संचार: सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स, जो वैश्विक स्तर पर व्यक्तिगत और पेशेवर संचार के लिए आवश्यक हैं, यहां उपलब्ध नहीं हैं.
आर्थिक विकास: मोबाइल भुगतान, डिजिटल बैंकिंग और वैश्विक बाजारों तक पहुंच के बिना उद्यमिता और वाणिज्य अवरुद्ध है.
सूचना प्रवाह: वैश्विक समाचार, स्वास्थ्य जानकारी और सरकारी पारदर्शिता तक पहुंच सीमित होने से अलगाव और गलत सूचना की समस्या बढ़ती है.
यह डिजिटल विभाजन इरिट्रिया की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को और गहरा करता है, जिससे देश का वैश्विक प्रगति के साथ तालमेल बनाना मुश्किल हो जाता है.
अन्य देशों के साथ तुलना
इरिट्रिया दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां इंटरनेट की पहुंच इतनी गंभीर रूप से सीमित है. कई विकासशील देशों में भी कनेक्टिविटी और सामर्थ्य की समस्या है, लेकिन अधिकांश में कम से कम बुनियादी मोबाइल डेटा सेवाएं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं. इरिट्रिया की अनूठी स्थिति इंटरनेट स्वतंत्रता की आधुनिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका और सरकारी प्रतिबंधों के खतरों को उजागर करती है.
भविष्य की संभावनाएं
डिजिटल अधिकारों और कनेक्टिविटी पर बढ़ता वैश्विक ध्यान भविष्य में इरिट्रिया में इंटरनेट पहुंच को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. अंतर्राष्ट्रीय संगठन और कार्यकर्ता अक्सर इंटरनेट स्वतंत्रता की वकालत करते हैं, जो संभावित रूप से सुधारों को प्रेरित कर सकता है. हालांकि, सरकारी नियंत्रण, बुनियादी ढांचे की कमी और गरीबी जैसी चुनौतियां अभी भी बाधा हैं. जब तक ये बाधाएं दूर नहीं होतीं, इरिट्रिया डिजिटल दुनिया से अलग-थलग एक दुर्लभ उदाहरण बना रहेगा.