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पुडुचेरी में 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप से कोई मौत नहीं

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24 अक्टू. 2025, 04:14 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

कोल्डरिफ
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पुडुचेरी । डेस्क: केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट टल गया है. यहाँ एक स्थानीय क्लिनिक की फार्मेसी से 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप की 25 बोतलें वितरित की गई थीं, जो उसी बैच SR-13 की थीं, जिसके कारण मध्य प्रदेश में कम से कम 23 बच्चों की दुखद मौत हुई थी.


मध्य प्रदेश में हुई त्रासदी ने देश भर के नियामक अधिकारियों को तुरंत उस जानलेवा बैच का पता लगाने के लिए मजबूर कर दिया. रिकॉर्ड की जाँच से जल्द ही पुष्टि हुई कि पुडुचेरी को इस बैच की 40 बोतलें सप्लाई की गई थीं.

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खतरे की इतनी अधिक आशंका के बावजूद, स्थानीय औषधि नियंत्रण प्रशासन (Drugs Control Administration - DCA) की त्वरित ट्रैकिंग और गहन निगरानी के प्रयास सफल रहे. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन बच्चों को यह सिरप दिया गया था, उनमें किसी भी प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया (ADR) या मृत्यु की सूचना नहीं मिली. औषधि नियंत्रण सूत्रों ने पुष्टि की कि पुडुचेरी में वितरित सिरप में, भले ही उस पर जानलेवा बैच संख्या SR-13 अंकित था, लेकिन उसमें घातक डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नहीं पाया गया, जो त्रासदी का कारण बना था.


यह संकट तब शुरू हुआ जब मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 23 बच्चों की मौत 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप पीने से हुई. तमिलनाडु स्थित सरेसन फार्मास्यूटिकल्स द्वारा निर्मित इस सिरप के बैच SR-13 में औद्योगिक विलायक डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की खतरनाक रूप से उच्च मात्रा पाई गई थी, जिसके कारण गंभीर किडनी फेल्योर हुआ था.


पुडुचेरी के औषधि नियंत्रक, डॉ. ई. आनंदकृष्णन, ने बताया कि स्थानीय बाजार में यह सप्लाई मध्य प्रदेश की घटना से पहले हो गई थी. हालांकि, उनके विभाग की प्रतिक्रिया निर्णायक और तत्काल थी. उन्होंने तुरंत बचे हुए स्टॉक को जब्त किया और वितरित क्लिनिक पर जिला क्लिनिकल स्थापना प्राधिकरण के साथ संयुक्त निरीक्षण शुरू किया, ताकि सिरप लेने वाले हर बच्चे की पहचान की जा सके और उन पर निगरानी रखी जा सके.


डॉ. आनंदकृष्णन ने पुष्टि की कि "सिरप का सेवन करने वाले बच्चों की निगरानी की गई है." स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित बच्चों को DEG विषाक्तता के किसी भी शुरुआती लक्षण के लिए कड़ी निगरानी में रखा, जिसके लक्षणों में आमतौर पर किडनी, लीवर और तंत्रिका तंत्र को नुकसान शामिल है.


DCA के इस सख्त और समय पर हस्तक्षेप से सफलता मिली. अधिकारियों ने यह रिपोर्ट किया कि, अन्य राज्यों में देखे गए विनाशकारी परिणामों के विपरीत, पुडुचेरी में कहीं से भी कोई प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया रिपोर्ट नहीं की गई. अधिकारियों ने बाद में पुष्टि की कि सप्लाई, जानलेवा बैच संख्या साझा करने के बावजूद, सौभाग्य से डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) से दूषित नहीं थी, जिससे संयोगवश एक बड़ी आपदा टल गई. (Input- Pharmabiz.com)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP