NIA ने बस्तर के मूलवासी बचाओ मंच के 3 के ख़िलाफ़ पेश किया आरोप पत्र
NIA ने 3 माओवादी सहयोगियों के खिलाफ दायर की चार्जशीट
नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने छत्तीसगढ़ में अवैध धन के संग्रह, वितरण और उपयोग से संबंधित एक मामले में प्रतिबंधित नक्सली संगठन के एक फ्रंटल संगठन से जुड़े तीन लोगों के खिलाफ सोमवार को चार्जशीट दायर की.
एनआईए के बयान के अनुसार, तीनों आरोपी - गजेंद्र मंडावी, लक्ष्मण कुंजाम और रघु मिड़ियामी - मूलवासी बचाओ मंच (एमबीएम) के पदाधिकारी थे, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार ने अक्टूबर 2024 में प्रतिबंधित कर दिया था.
ये तीनों पहले ही इस मामले में अपनी संलिप्तता के लिए गिरफ्तार किए जा चुके हैं.
एनआईए का दावा है कि रघु मिड़ियामी मूलवासी बचाओ मंच के बस्तर डिवीजन का अध्यक्ष था, जो सीपीआई (माओवादी) का एक फ्रंटल संगठन है. वह अवैध धन के संग्रह, भंडारण और वितरण जैसी गतिविधियों में शामिल था, जो सीपीआई (माओवादी) और इससे जुड़े फ्रंटल संगठन के लिए था.
आरोप है कि इन फंडों का उपयोग सीपीआई (माओवादी) द्वारा अपनी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता था, जिसमें सुरक्षा शिविरों की स्थापना और राज्य द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे विकास कार्यों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शामिल थे.
यह मामला छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 6 लाख रुपये की बरामदगी से संबंधित है, जो मूलवासी बचाओ मंच के मडवी और कुंजाम से प्राप्त हुए थे. एनआईए का दावा है कि ये दोनों प्रतिबंधित आतंकी संगठन सीपीआई (माओवादी) के नेताओं के निर्देश पर इस राशि को विभिन्न बैंक खातों में जमा करने जा रहे थे.
यह मामला शुरू में बीजापुर पुलिस द्वारा मार्च 2023 में दर्ज किया गया था, और एनआईए ने पिछले साल फरवरी में इसकी जांच अपने हाथ में ली थी. एनआईए के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि सीपीआई (माओवादी) द्वारा मूलवासी बचाओ मंच और इसी तरह के अन्य फ्रंटल संगठनों के माध्यम से धन का हस्तांतरण किया जाता था, और रघु मिड़ियामी स्थानीय स्तर पर धन वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला नोडल व्यक्ति था.
सिलगेर आंदोलन के बाद चर्चा में आया था मूलवासी बचाओ मंच
छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षाबलों के कैंप की स्थापना के विरोध में सिलगेर में आदिवासियों के आंदोलन के बाद पहली बार मूलवासी बचाओ मंच चर्चा में आया था.
इस आंदोलन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सुकमा जिले के सिलगेर गांव से हुई थी, जहां 13 मई 2021 की रात अर्धसैनिक बलों द्वारा एक शिविर स्थापित किया गया था.
इस शिविर का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर 17 मई 2021 को सुरक्षाबलों ने गोलीबारी की, जिसमें एक 14 वर्षीय लड़के सहित तीन ग्रामीणों की मौत हो गई थी. लाठीचार्ज के दौरान एक गर्भवती महिला की भी जान चली गई, जबकि लगभग 18 लोग घायल हो गए थे.
बाद में मूलवासी बचाओ मंच के माध्यम से विरोध प्रदर्शन किए गए थे. दावा था कि यह आम नागरिकों का संगठन है.
लेकिन पुलिस शुरु से आरोप लगाती रही कि यह माओवादियों द्वारा खड़ा किया गया संगठन है. बाद में राज्य सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था.