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न्यूज़क्लिक केस रद्द; HC बोला- कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग

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11 जून 2026, 07:06 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

प्रबीर पुरकायस्थ
प्रबीर पुरकायस्थ

नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यूज़ पोर्टल 'न्यूज़क्लिक' (NewsClick) और इसके प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दिल्ली पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मामलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. यह मामला विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़ा था. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को जारी रखना 'कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग' था. 


अदालत ने कहा कि जब मुख्य अपराध (प्रेडिकेट ऑफेंस) से जुड़ी एफआईआर ही रद्द हो गई है, तो ED का मामला (ECIR) भी स्वतः ही बंद होने योग्य हो जाता है.


यह मामला साल 2020 में दिल्ली पुलिस की EOW द्वारा दर्ज की गई उस एफआईआर से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि न्यूज़क्लिक की पैरेंट कंपनी 'पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड' ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान अमेरिकी कंपनी वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स से ₹9.59 करोड़ का विदेशी निवेश हासिल किया था. 


जांच एजेंसियों का दावा था कि डिजिटल न्यूज़ वेबसाइटों के लिए तय 26% की एफडीआई सीमा से बचने के लिए कंपनी के शेयरों की कीमत को बहुत बढ़ाकर आंका गया और इस राशि का एक बड़ा हिस्सा वेतन, परामर्श शुल्क और किराए के रूप में डायवर्ट किया गया. इसी एफआईआर के आधार पर ED ने बाद में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था.


हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि यह निवेश पूरी तरह से एक आर्थिक फैसला था, जिसमें कोई भी आपराधिक कृत्य सामने नहीं आता है. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दस्तावेजों का हवाला देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि उस समय डिजिटल मीडिया में एफडीआई पर ऐसी कोई सीमा या प्रतिबंध लागू नहीं था. 


इसके अलावा, अदालत ने यह भी कहा कि धोखाधड़ी के अपराध के लिए किसी पीड़ित पक्ष का होना जरूरी है, जबकि इस मामले में विदेशी निवेशक कंपनी की तरफ से कोई शिकायत नहीं थी और पुलिस की कार्रवाई महज एक मुखबिर की सूचना पर आधारित थी. 


वेतन और किराए जैसे खर्चों को मीडिया कंपनी के सामान्य कामकाजी खर्च बताते हुए अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग और आपराधिक साजिश के आरोपों को पूरी तरह आधारहीन माना और दोनों मामलों को रद्द करने का आदेश दिया.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP