सांप के ज़हर का नया इलाज: सुरक्षित व सस्ता अगली पीढ़ी का एंटीवेनम
नई दिल्ली । डेस्क: सांप के काटने से होने वाली मौतें और स्थायी विकलांगता आज भी दुनिया के कई हिस्सों में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनी हुई हैं. समय पर इलाज न मिलने पर अंग काटने तक की नौबत आ जाती है. अब इस दिशा में एक बड़ी वैज्ञानिक सफलता सामने आई है.
डेनमार्क की टेक्निकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पारंपरिक, पशु-आधारित एंटीवेनम की सीमाओं को तोड़ते हुए नई पीढ़ी के सुरक्षित, व्यापक और कम लागत वाले एंटीवेनम की दिशा में अहम प्रगति की है.
PEGs Europe 2025 सम्मेलन के दौरान टेक्नोलॉजी नेटवर्क्स से बातचीत में यूनिवर्सिटी के बायोलॉजिक्स इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. आंद्रेयास लाउस्टसेन-क्येल ने बताया कि मौजूदा एंटीवेनम तकनीक सौ साल से भी पुरानी है, जिसमें घोड़ों जैसे जानवरों में ज़हर इंजेक्ट कर एंटीबॉडी तैयार की जाती हैं. यह प्रक्रिया महंगी होने के साथ-साथ मरीजों में गंभीर एलर्जी और अन्य दुष्प्रभाव भी पैदा करती है.
उन्होंने बताया कि दुनिया में 600 से अधिक विषैले सांप हैं और हर एक का ज़हर अलग होता है, जिससे एक ही एंटीवेनम सभी सांपों पर प्रभावी नहीं हो पाता. साथ ही, पारंपरिक एंटीवेनम में केवल 10–30 प्रतिशत एंटीबॉडी ही वास्तव में ज़हर को निष्क्रिय करती हैं, जिससे लागत बढ़ती है और कई कंपनियों ने इसका उत्पादन बंद कर दिया है. इसका सबसे ज्यादा असर अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के ग्रामीण इलाकों पर पड़ा है.
इस चुनौती से निपटने के लिए डॉ. लाउस्टसेन-क्येल और उनकी टीम ने अफ्रीका के सबसे घातक एलापिड सांपों जैसे कोबरा और माम्बा के ज़हर पर काम किया. शोधकर्ताओं ने 18 अफ्रीकी सांपों के ज़हर के मिश्रण से लामा और अल्पाका को इम्यूनाइज किया और उनसे प्राप्त नैनोबॉडी के डीएनए अनुक्रम को ई. कोलाई बैक्टीरिया में डालकर बड़ी मात्रा में प्रयोगशाला में एंटीवेनम तैयार किया.
प्रीक्लिनिकल परीक्षणों में यह नया रीकॉम्बिनेंट एंटीवेनम सात प्रमुख टॉक्सिन सब-फैमिली को निष्क्रिय करने में सफल रहा.
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह शोध भविष्य में पशु-आधारित एंटीवेनम से हटकर सुरक्षित, सुलभ और बड़े पैमाने पर उत्पादन योग्य समाधान का रास्ता खोल सकता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी 2017 से सांप के काटने से होने वाली मौतों को कम करने के लिए वैश्विक प्रयास कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नई तकनीकें आने वाले समय में लाखों लोगों की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकती हैं.