डिजिटल राजनीति का नया भविष्य: इंस्टाग्राम एल्गोरिदम
नई दिल्ली । डेस्क: देश के सियासी गलियारों में अब जनसभाओं और लंबे भाषणों से इतर एक नया चुनावी अखाड़ा तैयार हो रहा है. हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और आंदोलनों के बाद अचानक भारतीय राजनीति में 'इंस्टाग्राम' सबसे ताकतवर हथियार बनकर उभरा है. अब तक एक्स (ट्यूटर) और फेसबुक तक सीमित रहने वाले दिग्गज नेता अब अपने मोबाइल फोन से खुद सीधे सेल्फी वीडियो बनाकर जनता से संवाद साध रहे हैं. हाल ही में 'ककरोच जनता पार्टी' के नाम से चर्चित हुए आंदोलन और युवाओं के डिजिटल विरोध के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राहुल गांधी जैसे दिग्गज नेताओं का ध्यान इंस्टाग्राम की ओर तेजी से आकर्षित हुआ है.
एल्गोरिदम का खेल और व्यक्तिगत ब्रांडिंग का दबदबा
डिजिटल मीडिया के जानकारों और शोधकर्ताओं के अनुसार, इंस्टाग्राम पर सफलता का पूरा राज इसके खास एल्गोरिदम में छिपा है. फेसबुक या एक्स के विपरीत, यहाँ किसी नेता को अपनी बात लाखों लोगों तक पहुँचाने के लिए पहले से करोड़ों 'फॉलोअर्स' की जरूरत नहीं होती. यदि वीडियो का कंटेंट ध्यान खींचने वाला और दिलचस्प है, तो प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम खुद-ब-खुद उसे उपयोगकर्ताओं की फीड में धकेल देता है. इसके अलावा, आंकड़ों से यह साफ जाहिर होता है कि इंस्टाग्राम पर संस्थागत या पार्टी के आधिकारिक पेजों की तुलना में नेताओं के व्यक्तिगत खातों और उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी रील्स को जनता ज्यादा पसंद कर रही है. यही वजह है कि नेता अब किसी प्रचार एजेंसी के बजाय खुद कैमरे के सामने आकर संवाद स्थापित कर रहे हैं.
फेसबुक छोड़कर क्यों इंस्टाग्राम की ओर भाग रहे युवा वोटर
इंटरनेट पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि देश की युवा आबादी का बड़ा हिस्सा अब धीरे-धीरे फेसबुक से दूरी बना रहा है. इसका मुख्य कारण फेसबुक पर परिवार के बड़े-बुजुर्गों और रिश्तेदारों की भारी मौजूदगी है. युवा और मध्यम वर्ग के लोग अब पारिवारिक निगरानी से दूर एक स्वतंत्र डिजिटल स्पेस चाहते हैं, जिसकी भरपाई इंस्टाग्राम कर रहा है. भारत में इंस्टाग्राम के करीब 25 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा 18 से 34 वर्ष के युवाओं का है. यही युवा वर्ग किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाता है, जिसे साधने के लिए राजनीतिक दल अब छोटे और असरदार रील्स वीडियो का सहारा ले रहे हैं.
गंभीर मुद्दों पर भारी पड़ रहा '20 सेकंड का ड्रामा'
राजनीतिक संवाद के इस डिजिटल रूपांतरण का एक चिंताजनक पहलू भी सामने आ रहा है. विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के मुताबिक, इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम शांत, तथ्यपरक और लंबी वैचारिक चर्चाओं के बजाय गुस्सा, तंज, हास्य और अत्यधिक उत्तेजना पैदा करने वाली 20 सेकंड की रील्स को ज्यादा बढ़ावा देता है. पुणे के फ्लेम विश्वविद्यालय के एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि राजनीतिक दल एल्गोरिदम का फायदा उठाने के लिए जानबूझकर उत्तेजक और भावनात्मक संदेश तैयार कर रहे हैं. इस होड़ में बेरोजगारी, शिक्षा नीति और संविधान जैसे जटिल व गंभीर विषय पीछे छूटते जा रहे हैं और सतही व चटाकेदार मुद्दे बाजी मार रहे हैं.
शीर्ष नेताओं में होड़, क्षेत्रीय स्तर पर अभी भी फेसबुक आगे
भले ही वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स के साथ इंस्टाग्राम पर सबसे लोकप्रिय नेता बने हुए हैं और राहुल गांधी भी सवाल-जवाब सत्रों के जरिए युवाओं से जुड़ रहे हैं, लेकिन राज्यों के स्तर पर यह बदलाव अभी पूरी तरह नहीं आया है. उदाहरण के तौर पर पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आज भी नेताओं और जनता के बीच फेसबुक का ही दबदबा कायम है. हालांकि, सभी प्रमुख दल यह भली-भांति समझ चुके हैं कि आने वाले दिनों में डिजिटल राजनीति की दिशा इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम ही तय करेगा.