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नेपाल का पीएम कौन? 3 नामों पर चर्चा, आंदोलनकारी बंटे

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11 सित. 2025, 06:40 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

नेपाल का पीएम कौन
नेपाल का पीएम कौन

काठमांडू । डेस्क: नेपाल में सरकार विरोधी आंदोलन की लहर में केपी शर्मा ओली की सरकार बह गई है. वर्तमान में नेपाल की कमान सेना के हाथों में है. लेकिन इसके बाद किसके नेतृत्व में नेपाल में अंतरिम सरकार बनेगी, इस पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कई नामों पर चर्चा चल रही है.


नेपाल की अंतरिम सरकार के प्रमुख कौन होंगे? भारत के पड़ोसी देश को किसके नेतृत्व में आगे बढ़ना चाहिए? केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद से ही यह सवाल विभिन्न हलकों में घूम रहा है. विभिन्न नामों पर चर्चा हो रही है. 


पहले सुनने में आया था कि अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में काठमांडू के निर्दलीय मेयर बालेंद्र शाह उर्फ बालेन का पलड़ा भारी है. लेकिन बुधवार को नेपाल के छात्र-युवा नेतृत्व की ओर से देश की सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का नाम सामने आया. यहां तक कि सुशीला को बालेन ने भी समर्थन दिया! कई लोगों ने सोचा कि अंतरिम सरकार की प्रमुख सुशीला ही होंगी. 


लेकिन गुरुवार को चर्चा में एक और नाम उभरा. सुना गया कि पूर्व इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कुल मान घिसिंग नेपाल की अंतरिम सरकार की कमान संभालें, ऐसा चाहते हैं वे आंदोलनकारी जिन्होंने जन आंदोलन में ओली सरकार को सत्ता से बेदखल किया. यानी, अंतरिम सरकार के प्रमुख कौन होंगे, इस पर वे खुद एकमत नहीं हो पा रहे हैं!


सरकार विरोधी आंदोलन की लहर में ओली सरकार बह गई. वर्तमान में नेपाल की कमान सेना के हाथों में है. बुधवार को औपचारिक रूप से जिम्मेदारी संभालने के बाद सेना ने देश भर में कर्फ्यू लगा दिया और स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश की. 


हालांकि रात में कर्फ्यू में ढील दी गई. गुरुवार सुबह से नेपाल में बड़े स्तर पर उत्तेजना या अशांति की खबर नहीं मिली. लेकिन कहीं-कहीं छिटपुट अशांति की तस्वीरें सामने आई हैं. खासकर, नेपाल की जेलों की सुरक्षा सेना के लिए सिरदर्द बनी हुई है. साथ ही अंतरिम सरकार गठन की प्रक्रिया भी चल रही है.


ओली का उत्तराधिकारी कौन?

अंतरिम सरकार के प्रमुख कौन होंगे, इस पर नेपाल के आंदोलनकारी 'जेन-जी' (युवा पीढ़ी) में ही फूट पड़ गई है. आंदोलन के दौरान नेपाल के छात्र-युवाओं के बीच लोकप्रिय हुए 35 वर्षीय बालेंद्र. अस्थिर समय में वे ही नेपाल की कमान संभाल सकते हैं, ऐसा माना जा रहा था. लेकिन बुधवार शाम से नेपाल के आकाश में सुशीला का नाम गूंजने लगा. आंदोलनकारियों के कई लोगों की पसंद की सूची में वे शामिल थीं.


अंतरिम सरकार के अगले प्रमुख को चुनने के लिए बुधवार को आंदोलनकारी छात्र काठमांडू में चर्चा में बैठे. ऑनलाइन विभिन्न जिलों से आंदोलनकारी नई पीढ़ी के प्रतिनिधि उस चर्चा सभा में शामिल हुए. अंत में कई घंटों की चर्चा के बाद पांच हजार से अधिक आंदोलनकारियों ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा सुशीला को चुना.


लेकिन गुरुवार को एक और नाम चर्चा में आया. आंदोलनकारियों का एक हिस्सा सुशीला को नहीं, बल्कि अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में कुल मान घिसिंग को चाहता है. नेपाल में बिजली की लंबी अवधि की कमी को दूर करने में उनका योगदान रहा है. 2016 में बिजली बोर्ड के प्रमुख बने. उस समय भारत का पड़ोसी देश गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा था. कभी-कभी दिन में 18 घंटे तक लोडशेडिंग होती थी. उस स्थिति में बिजली बोर्ड की कमान संभाली घिसिंग ने. कई लोग चाहते हैं कि जिस तरह उन्होंने नेपाल को अंधेरे से रोशनी की राह पर लाया, उसी तरह अस्थिर स्थिति में देश की जिम्मेदारी संभालें.


चर्चा में राष्ट्रपति और सेना प्रमुख

अंतरिम सरकार के प्रमुख कौन होंगे, इसे चुनने के लिए आंदोलनकारियों के साथ दौर दर दौर बैठक कर रहे हैं नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और देश के सेना प्रमुख अशोकराज सिगडेल. लेकिन गुरुवार रात तक कोई समाधान नहीं निकला. किस नाम पर मुहर लगेगी, यह अंतिम नहीं हुआ. आंदोलनकारियों के साथ दौर पर दौर बैठक कर रहे हैं रामचंद्र और अशोकराज. कब अंतरिम सरकार के प्रमुख का नाम घोषित होगा, इस पर विभिन्न हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं.


आंदोलनकारियों में संघर्ष

सुशीला या घिसिंग? आंदोलनकारी खुद बंटे हुए हैं. कई समाचार माध्यमों में दावा किया गया कि आंदोलनकारियों के बीच दो संभावित प्रमुखों को लेकर मतभेद उभरा. काठमांडू में सेना मुख्यालय के बाहर दो गुटों के बीच संघर्ष की घटना भी हुई है, ऐसा सुनने में आ रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP