भारतीय सख्त नियमों से नेपाल के चाय निर्यातक संकट में
काठमांडू । डेस्क: भारत सरकार द्वारा नेपाली चाय के आयात नियमों में ढील दिए जाने के महज दो सप्ताह बाद ही दोनों देशों के बीच चाय व्यापार में एक बार फिर बड़ा गतिरोध पैदा हो गया है. भारतीय अधिकारियों ने नेपाल से खरीदी गई चाय की अनिवार्य सैंपलिंग और प्रयोगशाला परीक्षण की प्रक्रिया को अचानक दोबारा शुरू कर दिया है.
इस अप्रत्याशित कदम से भारतीय खरीदार सहम गए हैं और उन्होंने नेपाल से चाय की खरीद को फिलहाल पूरी तरह से निलंबित कर दिया है, जिससे सीमा पर नेपाल का चाय निर्यात एक बार फिर ठप हो गया है.
नेपाली चाय निर्यातकों के अनुसार, चाय बोर्ड ऑफ इंडिया (Tea Board of India) ने भारतीय व्यापारियों के गोदामों से चाय के सैंपल इकट्ठा करना शुरू कर दिया है. बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया है कि जब तक प्रयोगशाला से इन सैंपलों को हरी झंडी नहीं मिल जाती, तब तक इस चाय को भारतीय बाजार में बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
इस नए नियम के कारण भारतीय आयातकों में अनिश्चितता और डर का माहौल है, क्योंकि उन्हें आशंका है कि यदि जांच में चाय मानकों पर खरी नहीं उतरी, तो उन्हें पूरी खेप को नष्ट करना पड़ सकता है. इसी डर से पिछले चार-पांच दिनों से भारतीय व्यापारियों ने नेपाली आपूर्तिकर्ताओं से चाय खरीदना बंद कर दिया है.
इस नए संकट का सबसे बड़ा असर मुख्य रूप से ऑर्थोडॉक्स चाय के निर्यात पर पड़ा है. नेपाल टी प्लांटर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता ने बताया कि इस सीजन में ग्रीन लीव्स यानी हरी पत्तियों की कम उपलब्धता के कारण क्रश, टियर और कर्ल (CTC) चाय का उत्पादन पहले ही लगभग 50 प्रतिशत तक गिर चुका है, इसलिए अभी भारत भेजी जा रही अधिकांश चाय ऑर्थोडॉक्स ही है.
नेपाल अपनी कुल ऑर्थोडॉक्स चाय का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा भारत को निर्यात करता है, जिससे इसकी भारतीय बाजार पर निर्भरता अत्यधिक है.
यह गतिरोध ऐसे समय में आया है जब नेपाल का चाय क्षेत्र पहले से ही संकट से जूझ रहा है. पिछले वित्तीय वर्ष में कीड़ों के प्रकोप (लूपर पेस्ट इन्फेस्टेशन) के कारण चाय उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत की भारी गिरावट आई थी, और बढ़ती लागत से परेशान होकर कई किसान दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं.
व्यापार और निर्यात संवर्धन केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष के पहले 10 महीनों में नेपाल ने 3.35 अरब रुपये मूल्य की 11,393 टन चाय का निर्यात किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के 14,030 टन (मूल्य 3.97 अरब रुपये) से काफी कम है.
हालांकि नेपाल और भारत के बीच खाद्य परीक्षण प्रमाण पत्रों की द्विपक्षीय मान्यता को लेकर पिछले साल कुछ सहमति बनी थी, जिसमें भारत ने नेपाल की प्रयोगशाला द्वारा जारी सर्टिफिकेट्स को कुछ उत्पादों के लिए मान्यता दी थी, लेकिन चाय को अब तक यह सुविधा नहीं मिल सकी है.
नेपाल चाय और कॉफी विकास बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस नई सख्ती की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन जमीनी स्तर पर निर्यात पूरी तरह बाधित हो चुका है, जिसने नेपाली उत्पादकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं.