नेपाल: अब मिलेंगे सिर्फ आधे भरे सिलेंडर, जमाखोरी रोकने फैसला
काठमांडू । डेस्क: नेपाल में रसोई गैस (एलपीजी) की किल्लत और बाजार में बढ़ती अफरातफरी को देखते हुए नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन (NOC) ने एक बड़ा फैसला लिया है. सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनी ने गैस बॉटलिंग प्लांटों को निर्देश दिया है कि वे अब उपभोक्ताओं को 14.2 किलोग्राम के बजाय केवल 7.1 किलोग्राम के आधे भरे हुए सिलेंडर ही बेचें. इससे गैस सिलेंडर दुगने उपभोक्ताओं को दिये जा सकेंगे. हालांकि, यह सिलेंडर पहले की तुलना में आधे दिन ही चलेगा फिर भी इससे जमाखोरी पर लगाम लगेगी.
यह नया नियम घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ होटल और रेस्टोरेंट पर भी तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.
निगम के अनुसार, आधे सिलेंडर की कीमत 955 रुपये तय की गई है. हालांकि नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन का दावा है कि भारत से गैस की आपूर्ति सामान्य है, लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण नेपाल के बाजारों में 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी) शुरू हो गई है.
इसी के चलते काठमांडू घाटी समेत कई इलाकों में गैस डिपो पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और स्थानीय किराना दुकानों से गैस गायब हो गई है. निगम का मानना है कि आधे भरे सिलेंडर बेचने से जमाखोरी पर लगाम लगेगी और अधिक से अधिक परिवारों तक ईंधन पहुँच सकेगा.
आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल में हर महीने लगभग 45,000 से 46,000 टन एलपीजी की मांग रहती है और फिलहाल इतनी ही मात्रा में आपूर्ति हो रही है.
देश के 44.3 प्रतिशत परिवार खाना पकाने के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं, जबकि बागमती प्रांत और काठमांडू घाटी में यह निर्भरता करीब 70 प्रतिशत तक है. गौरतलब है कि नेपाल ने इससे पहले 2015 और 2020 के संकट के दौरान भी इसी तरह के उपाय अपनाए थे.