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नेपाल में जेन-ज़ी प्रदर्शनों में 19 की मौत

नेपाल में जेन-ज़ी प्रदर्शनों में 19 की मौत- काठमांडू पोस्ट

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08 सित. 2025, 01:37 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

नेपाल विरोध प्रदर्शन
नेपाल विरोध प्रदर्शन

काठमांडू । डेस्क: नेपाल की राजधानी काठमांडू और अन्य शहरों में सोमवार को जेन-ज़ी के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की गोलीबारी में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई. भ्रष्टाचार और हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ काठमांडू, पोखरा, बुटवल, भैरहवा, भरतपुर, इटहरी और दमक सहित विभिन्न शहरों में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया.


गौरतलब है कि नेपाल सरकार ने बीते सप्ताह 26 प्लेटफ़ॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया था. इनमें फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे चर्चित सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म शामिल हैं. सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को देश के क़ानूनों का पालन करने, स्थानीय दफ़्तर खोलने और ग्रीवांस अधिकारी नियुक्त करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था.


चीन की सोशल मीडिया कंपनी टिकटॉक ने समय रहते इन शर्तों का पालन कर लिया, इसलिए टिकटॉक पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया. नेपाल में बड़ी संख्या में लोग विदेशों में रहते हैं. मैसेजिंग ऐप और सोशल मीडिया पर बैन के बाद विदेशों में रह रहे नेपाली नागरिकों को परिवार से संपर्क करने में दिक़्क़तें आ रही हैं.


प्रदर्शन, जो शुरू में काठमांडू के न्यू बनेश्वर में केंद्रित थे, दिनभर में तेजी से बढ़ गए, प्रशासन ने दोपहर 3:30 बजे से कर्फ्यू लागू कर दिया था. अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, केवल काठमांडू में ही 17 लोगों की मौत हुई-नेशनल ट्रॉमा सेंटर में 8, एवरेस्ट हॉस्पिटल में 3, सिविल हॉस्पिटल में 3, काठमांडू मेडिकल कॉलेज में 2, और त्रिभुवन टीचिंग हॉस्पिटल में 1. सुनसरी में, इटहरी में प्रदर्शन के दौरान गोली लगने से दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, जिससे देशभर में मृतकों की संख्या 19 हो गई.


देशभर के अस्पतालों में कम से कम 347 घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज चल रहा है. सिविल हॉस्पिटल में 100, ट्रॉमा सेंटर में 59, एवरेस्ट में 102, KMC में 37, बीर हॉस्पिटल में 6, पाटन हॉस्पिटल में 4, त्रिभुवन टीचिंग में 18, नोर्विक में 3, बीपी कोइराला इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज में 2, गंडकी मेडिकल कॉलेज में 1, बीरत मेडिकल कॉलेज में 4, और दमक हॉस्पिटल में 7 मरीजों का इलाज हो रहा है.


कई अस्पतालों के डॉक्टरों ने पुष्टि की कि दर्जनों मरीज गंभीर हालत में हैं. एवरेस्ट हॉस्पिटल के डॉ. अनिल अधिकारी ने बताया कि चार मरीजों की हालत गंभीर है, जबकि ट्रॉमा सेंटर के डॉ. दीपेंद्र पांडे ने कहा कि 10 मरीज गंभीर हैं, जिन्हें सिर और छाती में गोली लगी है.


पुलिस ने बनेश्वर में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार, आंसू गैस और जिंदा गोलियों का इस्तेमाल किया, जहां प्रदर्शनकारी फेडरल संसद भवन के बाहर जमा हुए थे. पोखरा, बीरतनगर, जनकपुर, हेटौड़ा और नेपालगंज सहित अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन फैल गए.


सुनसरी में, इटहरी उपमहानगरपालिका कार्यालय के सामने एक प्रदर्शनकारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य, जो गंभीर रूप से घायल होकर धरान के बीपी कोइराला इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज में भर्ती था, बाद में मृत्यु हो गई.


झापा में, प्रदर्शनकारियों ने दमक में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के आवास पर पत्थर फेंके. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवा में कई राउंड गोलियां चलाईं. प्रदर्शनकारियों ने पूर्व-पश्चिम राजमार्ग के कुछ हिस्सों को टायर जलाकर अवरुद्ध कर दिया.


इससे पहले, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक बयान जारी कर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों दोनों से संयम बरतने का आग्रह किया था. आयोग ने कहा कि संविधान और अंतरराष्ट्रीय कानून शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की गारंटी देते हैं, और हिंसा और अत्यधिक बल प्रयोग को 'खेदजनक' बताया.


जेन-ज़ी के रूप में पहचान करने वाले युवाओं के नेतृत्व में ये प्रदर्शन भ्रष्टाचार और राजनीतिक विफलता के खिलाफ देशव्यापी स्तर पर भड़क उठे. सुबह से ही काठमांडू और अन्य शहरी केंद्रों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, जिसमें छात्र और युवा संगठन सबसे आगे थे.


प्राधिकरणों ने कई जिलों में कर्फ्यू लागू करके जवाब दिया है, उन क्षेत्रों में सभाओं और आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है जहां प्रदर्शन सबसे तीव्र थे. सुरक्षा बल काठमांडू और अन्य शहरों में प्रमुख चौराहों पर गश्त जारी रखे हुए हैं, जबकि अस्पताल घायलों की भीड़ से जूझ रहे हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP