नेपाल बाढ़: चीनी सीमा पर फंसे 400 भारतीय सुरक्षित, 320 अब भी लापता
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में अब भी कम से कम 320 भारतीय नागरिक लापता हैं, जबकि लगभग 400 अन्य भारतीय चीन की सीमा के पास फंसे हुए हैं. राहत की बात यह है कि सीमा पार फंसे सभी 400 भारतीय पूरी तरह सुरक्षित हैं और अपने परिवारों तथा भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में बताया कि बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास स्थानीय चीनी अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है, ताकि फंसे हुए लोगों की सुरक्षित निकासी की जल्द व्यवस्था की जा सके. इसके अतिरिक्त, भारतीय मूल के लगभग 100 अन्य विदेशी नागरिक (जो संभवतः कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे) भी वर्तमान में संपर्क से बाहर हैं.
बाढ़ प्रभावित इलाकों से बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है. चीन की ओर फंसे 96 भारतीय स्थल मार्ग से सुरक्षित नेपाल लौट चुके हैं, जबकि तमिलनाडु के 21 बचाए गए नागरिकों को काठमांडू से इंडिगो की उड़ान द्वारा नई दिल्ली लाया गया है.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के मुताबिक, राज्य के 37 निवासी अभी भी लापता हैं, जबकि दो से संपर्क स्थापित हो गया है. नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट जैसे गंभीर रूप से प्रभावित जिलों से अब तक 85 भारतीयों समेत 121 विदेशी पर्यटकों को रेस्क्यू किया जा चुका है. राहत और बचाव अभियान में नेपाल सेना के 2,391 जवानों सहित कुल 7,451 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं.
आपदा की इस घड़ी में भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल को लगातार मानवीय सहायता पहुंचा रहा है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने शुक्रवार को 10 टन राहत सामग्री की तीसरी खेप काठमांडू भेजी, जिसमें पोर्टेबल जनरेटर, खाद्य पैकेट, स्वच्छता किट और जल शोधन गोलियां शामिल हैं.
इससे पहले बुधवार को 10 टन और गुरुवार को 37.5 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है. इसके साथ ही 11 डॉक्टरों और पैरामेडिक्स की एक विशेषज्ञ टीम तथा सुरंग बचाव कार्यों के आकलन के लिए एक विशेष टोही दल भी नेपाल रवाना किया गया है.
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने भोटेकोशी और त्रिशूली क्षेत्रों में फिर से बाढ़ का खतरा जताते हुए सभी को अलर्ट पर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है.