आदिवासी समर्थन से बनी सरकार में उन्हीं की उपेक्षा: डॉ. प्रेमसाय सिंह
अंबिकापुर । संवाददाता: सरगुजा संभाग सहित बस्तर और कोरबा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों के बल पर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी अब उसी वर्ग के अधिकारों की अनदेखी कर रही है. कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर 9 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस का अघोषित बहिष्कार करने का गंभीर आरोप लगाया है.
अंबिकापुर स्थित राजीव भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह और जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने भाजपा की प्राथमिकताओं और नीतियों पर सवाल खड़े किए.
कांग्रेस नेताओं ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि देश की राष्ट्रपति और प्रदेश के मुख्यमंत्री दोनों आदिवासी समाज से संबंध रखते हैं, फिर भी इस विशेष अवसर पर सरकार की ओर से एक आधिकारिक बधाई संदेश तक जारी नहीं किया गया.
पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह ने कहा कि संघ परिवार और भाजपा वास्तव में इस वर्ग को 'आदिवासी' स्वीकार ही नहीं करते, बल्कि उन्हें 'वनवासी' कहकर उनके अस्तित्व और पहचान को छोटा करने का प्रयास करते हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महापुरुषों की प्रतिमाएं लगाकर केवल वोट बैंक की 'टोकनिज्म' की राजनीति करती है, जबकि दूसरी ओर आदिवासी क्षेत्रों के जंगलों और कृषि भूमियों को उद्योगपतियों को सौंपकर उन्हें संसाधन विहीन बनाया जा रहा है.
पत्रकार वार्ता के दौरान आदिवासी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अनिल पैकरा ने कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद इस दिवस की उपेक्षा संघ के दबाव को दर्शाती है. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार आदिवासियों के आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों को भी धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में बढ़ रही है.
वहीं, कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने याद दिलाया कि सरगुजा की सभी 14 सीटों समेत पूरे प्रदेश में आदिवासी समुदाय के भारी समर्थन से ही भाजपा की सरकार बनी है. स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस की जनकल्याणकारी नीतियों के कारण ही आज यह समाज शिक्षित होकर देश के विकास में बराबरी से योगदान दे रहा है. ऐसे में आदिवासी मंत्रियों और विधायकों की इस उपेक्षा पर चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है.