नील कात्याल: वो भारतीय-अमेरिकी वकील जिसने झुका दिया ट्रंप को
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की उस महत्वाकांक्षी टैरिफ नीति को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है, जिसे वे अपनी आर्थिक नीति का केंद्रबिंदु बताते थे.
ट्रंप की इस 'टैरिफ दीवार' को गिराने वाले मुख्य खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि भारतीय मूल के दिग्गज वकील नील कात्याल हैं. 55 वर्षीय कात्याल ने छोटे कारोबारियों की ओर से पैरवी करते हुए यह दलील दी कि संविधान के अनुसार केवल कांग्रेस को कर लगाने का अधिकार है और टैरिफ भी एक प्रकार का टैक्स ही है.
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद कात्याल ने इसे कानून के शासन की जीत बताया और कहा कि राष्ट्रपति कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, वह संविधान से ऊपर नहीं है.
यह पहला मौका नहीं है जब कात्याल ने किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की नीतियों को चुनौती दी हो.
लगभग 20 साल पहले उन्होंने जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के ग्वांतनामो बे में सैन्य सुनवाई के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर जीत हासिल की थी.
ट्रंप ने इस अदालती फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'हास्यास्पद' बताया और न्यायाधीशों की आलोचना की.
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत नील कात्याल के करियर की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक जीत है, क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 90 वर्षों में पहली बार किसी राष्ट्रपति की इतनी बड़ी नीतिगत पहल को इस तरह खारिज किया है.
ओबामा प्रशासन में कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रह चुके कात्याल अब भविष्य में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पद के लिए सबसे मजबूत दावेदारों में से एक माने जा रहे हैं.