इतिहासकारों ने NCERT पर लगाया विकृत इतिहास का आरोप
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय इतिहास कांग्रेस ने एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि इनमें "झूठी जानकारी और सांप्रदायिक उद्देश्यों से प्रेरित विकृति" शामिल है. विशेष रूप से, देश के विभाजन से संबंधित नए मॉड्यूल की कड़ी आलोचना की गई है.
इतिहासकारों का कहना है कि यह सामग्री बच्चों के दिमाग में गलत इतिहास भर रही है.
इस महीने, एनसीईआरटी ने छठी से बारहवीं कक्षा की इतिहास और राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में एक नया अध्याय जोड़ा, जिसमें भारत के विभाजन और पाकिस्तान के गठन के लिए कांग्रेस, मोहम्मद अली जिन्ना और लॉर्ड माउंटबेटन को जिम्मेदार ठहराया गया है.
विशेष रूप से, इसमें कांग्रेस को विभाजन के लिए दोषी बताया गया है, जबकि ब्रिटिश शासकों को लगभग बरी कर दिया गया है. भारतीय इतिहास कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है.
प्रस्ताव में कहा गया है कि 1937 में हिंदू महासभा ने सबसे पहले भारत के विभाजन की मांग उठाई थी, और 1940 में जिन्ना के नेतृत्व वाली मुस्लिम लीग ने भी यही मांग दोहराई थी.
हालांकि, एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक में लिखा गया है, "भारत के विभाजन के लिए तीन पक्ष जिम्मेदार थे-जिन्ना, जिन्होंने विभाजन की मांग की; कांग्रेस, जिसने विभाजन के प्रस्ताव को स्वीकार किया; और लॉर्ड माउंटबेटन, जिन्होंने इसे लागू किया." इतिहासकारों का आरोप है कि यह बयान राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है.
इसके अलावा, कश्मीर मुद्दे को भी विभाजन से जोड़कर जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस को निशाना बनाया गया है.
पाठ्यपुस्तक में लिखा है, "विभाजन के बाद कश्मीर एक नई समस्या के रूप में उभरा, जो पहले भारत में कभी नहीं थी."
नेहरू के समय की भारत की विदेश नीति को "दिशाहीन" बताया गया है.
पिछले सप्ताह कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इन पाठ्यपुस्तकों को "संघ परिवार की साजिश का हिस्सा" करार दिया था.
अब इतिहासकारों के एक वर्ग ने भी इन पाठ्यपुस्तकों पर आपत्ति जताई है.