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छत्तीसगढ़ के अवैध हथियारों का निशाना झारखंड में वन्यजीव

छत्तीसगढ़ से तस्करी हथियारों का निशाना झारखंड में वन्यजीव

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24 अग. 2025, 01:12 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

देशी बंदूक
देशी बंदूक

रांची । डेस्क: छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा पर स्थित बुढ़ापहाड़, जो कभी नक्सलियों का गढ़ था, अब वन्यजीव शिकार की नई चुनौती बन रहा है. पलामू टाइगर रिजर्व में हाल ही में नौ शिकारियों की गिरफ्तारी से छत्तीसगढ़ से हथियारों की तस्करी का खुलासा हुआ है.


20 अगस्त को पलामू टाइगर रिजर्व में नौ लोगों को बाघों और अन्य वन्यजीवों के शिकार के आरोप में गिरफ्तार किया गया. जांच में पता चला कि छत्तीसगढ़ से तस्कर न केवल देसी बंदूकें सप्लाई कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों को ट्रक स्टीयरिंग और पाइप से हथियार बनाने की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं.


पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने बताया कि पिछले एक साल में 40 से अधिक देसी बंदूकें जब्त की गई हैं और कई लोगों ने हथियार सरेंडर किए हैं.


ट्रक स्टीयरिंग से बनी बंदूकें

छत्तीसगढ़ के तस्कर ट्रक स्टीयरिंग जैसे सामान से बंदूक के बैरल बनाते हैं और ग्रामीणों को हथियार निर्माण की ट्रेनिंग देते हैं. गढ़वा के भंडारिया और बुढ़ापहाड़ जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर देसी बंदूकें बनाई जा रही हैं. ये बंदूकें 12 बोर की होती हैं, जिनमें .315 गोली या बारूद का उपयोग होता है. इनका रेंज 20-25 मीटर है और ये मुख्य रूप से वन्यजीव शिकार और आपराधिक गतिविधियों में उपयोग होती हैं.


बुढ़ापहाड़, जो कभी नक्सलियों का प्रशिक्षण केंद्र था, अब हथियार निर्माण और शिकार का केंद्र बन गया है. कई ग्रामीणों ने नक्सलियों से हथियार बनाने की कला सीखी है.


पलामू टाइगर रिजर्व और पुलिस ने हथियार तस्करी और वन्यजीव शिकार के खिलाफ अभियान शुरू किया है. प्रजेशकांत जेना ने कहा कि छत्तीसगढ़ से सामग्री की तस्करी और हथियार निर्माण की निगरानी की जा रही है. पुलिस और पलामू टाइगर रिजर्व की संयुक्त कार्रवाई से इस अवैध कारोबार को रोकने का प्रयास किया जा रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP