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नक्सल: छत्तीसगढ़ में बचे सिर्फ तीन 'सबसे अधिक प्रभावित' जिले

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03 नव. 2025, 12:51 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

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नई दिल्ली । डेस्क: देश भर में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 46 से घटकर 38 हो गई है, जो वामपंथी उग्रवाद (LWE) से निपटने की सरकारी नीति में एक महत्वपूर्ण सफलता को दर्शाता है. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 15 अक्टूबर को अधिसूचित नवीनतम वर्गीकरण में, अब केवल तीन जिलों को 'सबसे अधिक प्रभावित जिलों' के रूप में वर्गीकृत किया गया है, और वे सभी छत्तीसगढ़ राज्य में हैं.


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में अब केवल तीन जिले बीजापुर, नारायणपुर, और सुकमा 'सबसे अधिक प्रभावित जिलों' की श्रेणी में आते हैं. 


अप्रैल में इस श्रेणी में छह जिले थे, यानी तीन जिलों को अब इस सूची से बाहर कर दिया गया है. यह कमी सुरक्षा बलों की आक्रामक कार्रवाई और सरकार की 'नेशनल पॉलिसी एंड एक्शन प्लान टू एड्रेस लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म 2015' का परिणाम है.


हालांकि, छत्तीसगढ़ का एक और जिला, कांकेर, अभी भी 'जिले जो चिंता का विषय हैं' की श्रेणी में शामिल है. इसके अलावा, दंतेवाड़ा, गरियाबंद, और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी को 'अन्य LWE प्रभावित जिलों' के तहत सूचीबद्ध किया गया है.


अन्य राज्यों में, 'जिले जो चिंता का विषय हैं' की श्रेणी में झारखंड का पश्चिम सिंहभूम, मध्य प्रदेश का बालाघाट, और महाराष्ट्र का गढ़चिरौली शामिल हैं.


यह वर्गीकरण सुरक्षा-संबंधी व्यय योजना का हिस्सा है, जिसके तहत केंद्र सरकार राज्यों को आंतरिक सुरक्षा समस्या से निपटने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है. 


गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP