इंदौर अस्पताल में चूहें काटने से नवजातों की मौत, जांच शुरू
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इंदौर । डेस्क: मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (MYH) में एक दिल दहलाने वाली घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया है. अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में चूहों ने दो नवजात शिशुओं पर हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों की मृत्यु हो गई. यह घटना रविवार और सोमवार को हुई, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं.
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने कहा, "दोनों शिशुओं को जन्मजात रक्ताल्पता थी और उन्हें अन्य जिलों से रेफर किया गया था. एक का वजन 1 किलो और दूसरे का 1.6 किलो था, साथ ही उनका हीमोग्लोबिन भी कम था. शिशुओं पर काटने के निशान थे, लेकिन यह उनकी मृत्यु का कारण नहीं था." उन्होंने दावा किया कि एक शिशु की मृत्यु निमोनिया और दूसरे की सेप्टिसीमिया के कारण हुई.
हालांकि, अस्पताल कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि NICU में कई दिनों से बड़े चूहे घूम रहे थे, लेकिन इसकी सूचना समय पर नहीं दी गई. सीसीटीवी फुटेज में चूहों को नवजात शिशुओं के पास लटके हुए झूलों पर कूदते हुए देखा गया. डॉ. यादव ने बताया कि अस्पताल में आखिरी बार पांच साल पहले व्यापक कीट नियंत्रण किया गया था.
कार्रवाई और जांच
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की. दो नर्सों को निलंबित कर दिया गया, नर्सिंग अधीक्षक को हटा दिया गया, और बाल रोग विभाग के प्रमुख को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. कीट नियंत्रण एजेंसी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और उसे समाप्ति नोटिस जारी किया गया. एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया और अस्पताल अधीक्षक से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
राजनीतिक विवाद
इस घटना ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है. विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का आरोप लगाया. कांग्रेस विधायक और विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, "नवजात शिशुओं पर रहम करो सरकार! इंदौर के MY अस्पताल में चूहे नवजातों को कुतर रहे हैं और बीजेपी सरकार पांच साल से कीट नियंत्रण नहीं करा पाई! यह सिर्फ लापरवाही नहीं, नरसंहार है."
कांग्रेस प्रवक्ता नीलभ शुक्ला ने इस घटना को "मानव संवेदनाओं को झकझोर देने वाला" बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की. उन्होंने कहा, "अगर सरकार अस्पताल में नवजात शिशुओं को सुरक्षित नहीं रख सकती, तो आम जनता की सुरक्षा की उम्मीद करना बेकार है."
यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में चूहों की समस्या ने सुर्खियां बटोरी हैं. 2023 में, भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक मृत व्यक्ति के कान को चूहों ने काट लिया था, और विदिशा जिला अस्पताल में एक दुर्घटना पीड़ित के मृत शरीर के नाक और हाथ को चूहों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था.
अस्पताल प्रशासन ने अब हर सात दिन में कीट नियंत्रण करने का आदेश दिया है और रोगियों के परिजनों से वार्ड में खाना न लाने की अपील की है, क्योंकि यह चूहों को आकर्षित करता है.
यह घटना इंदौर जैसे शहर में, जिसे भारत का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, और भी शर्मनाक है. जनता और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल की बदहाल स्थिति और स्वच्छता की कमी पर सवाल उठाए हैं. जन स्वास्थ्य अभियान ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत दर्ज की है, जिसमें इसे "बाल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन" बताया गया है.
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा, "यह एक गंभीर मामला है, जिस पर तत्काल कार्रवाई की गई है. अगर समय पर कीट नियंत्रण किया गया होता, तो चूहे नहीं होते."