अंधविश्वास में सगे भाइयों की बलि देने वाले मां, बहनों को उम्रकैद
सक्ती । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से अंधविश्वास और दोहरे हत्याकांड का एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां अदालत ने अपने ही दो भाइयों की हत्या करने वाले परिवार के चार सदस्यों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. बाराद्वार थाना क्षेत्र के ग्राम तांदुलडीह में दो साल पहले हुई इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना में मां, दो बहनों और एक भाई ने मिलकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था.
मामले की पैरवी शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक उदय वर्मा ने की, जिसके बाद अदालत ने करीब डेढ़ साल तक चली लंबी सुनवाई और पुख्ता सबूतों के आधार पर चारों आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस हत्याकांड की मुख्य वजह अंधविश्वास का विरोध करना थी. दरअसल, परिवार की बड़ी बहन अमरिका सिदार ने करीब छह साल पहले उज्जैन के एक बाबा उमाकांत से गुरु दीक्षा ली थी, जिसके बाद से घर में तंत्र-मंत्र का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा था.
मृतक भाई विकास सिदार (25) और विक्की सिदार (22) इस ढोंग और अंधविश्वास के सख्त खिलाफ थे और परिजनों को इससे दूर रहने की नसीहत देते थे.
इसी बात से नाराज होकर परिवार के बाकी सदस्यों ने दोनों भाइयों को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली और उन्हें विशेष गुरु पूजा के बहाने बुलाकर बंधक बना लिया.
वारदात के समय पूरा परिवार एक कमरे में बंद होकर पिछले सात दिनों से उपवास और कथित तंत्र साधना कर रहा था. जब कमरे के भीतर से अजीबोगरीब आवाजें और चीखें आने लगीं, तो पड़ोसियों ने अनहोनी की आशंका के चलते पुलिस को इसकी सूचना दी.
17 अक्टूबर 2024 को जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद खौफनाक था. घर के अंदर 'जय गुरुदेव' के नारों के बीच धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था, और उसी कमरे में दोनों भाई बेसुध पड़े हुए थे.
अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. आरोपी इस कदर अंधविश्वास में डूबे थे कि वे दावा कर रहे थे कि दोनों भाई सत्संग में गए हैं और साधना के बल पर उन्हें दोबारा जिंदा कर दिया जाएगा.