पाकिस्तान में टीटीपी का आतंकी हमला तेज, 17 लोगों की मौत
इस्लामाबाद । डेस्क: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आतंकवादियों ने तीन अलग-अलग हमलों में सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हमला किया, जिसमें कम से कम 17 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए. बाजौर जिले में एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटक से भरे वाहन को सुरक्षा चेकपॉइंट की ओर ले जाकर धमाका किया. पाकिस्तानी सेना के अनुसार, इस हमले में 11 सुरक्षा कर्मी और एक बच्ची (लड़की) की मौत हो गई, जबकि 7 अन्य घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं.
विस्फोट की तीव्रता से पास की एक इमारत ढह गई, जिससे बच्ची की मौत हुई. कुछ रिपोर्टों में इसे मदरसे की दीवार से टकराने वाला हमला बताया गया है, जहां पुलिस और फ्रंटियर कोर के जवान मौजूद थे.
इससे पहले उसी दिन बन्नू जिले में एक पुलिस स्टेशन के प्रवेश द्वार के पास पार्क की गई मोटरसाइकिल में लगे विस्फोटक में धमाका हुआ, जिसमें 2 लोग मारे गए और कम से कम 17 घायल हुए.
तीसरे घटनाक्रम में शांगला जिले में पुलिस की सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों और विद्रोही लड़ाकों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें 3 पुलिसकर्मी और 3 आतंकी मारे गए. पुलिस के अनुसार, मारे गए आतंकी चीनी नागरिकों पर हमलों में शामिल थे.
ये हमले 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद से पाकिस्तान में सुरक्षा बलों पर हो रहे हमलों की बढ़ती संख्या का हिस्सा हैं. इस्लामाबाद ने अधिकांश हमलों का आरोप पाकिस्तान तालिबान (टीटीपी) पर लगाया है, जिसके नेता कथित रूप से अफगानिस्तान में शरण लिए हुए हैं. 2025 के पहले तीन तिमाहियों में ही 2,400 से अधिक मौतें दर्ज की गईं, जो पिछले साल की तुलना में बढ़ोतरी दर्शाती है.
ये घटनाएं पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा क्षेत्र में बढ़ते अस्थिरता और टीटीपी की सक्रियता को उजागर करती हैं.
गौरतलब है कि पाकिस्तान तालिबान (टीटीपी) एक उग्रवादी संगठन है जो 2007 से पाकिस्तानी राज्य के खिलाफ जिहाद चला रहा है. अफगान तालिबान की 2021 में सत्ता वापसी के बाद टीटीपी को अफगानिस्तान में शरण मिलने से इसके हमले तेज हुए हैं.
पाकिस्तान टीटीपी को अफगान तालिबान द्वारा समर्थित बताता है, जबकि काबुल इनकार करता है. इससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है. पाकिस्तान भारत पर भी टीटीपी को समर्थन देने का आरोप लगाता है, जो क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ाता है. 2025-2026 में टीटीपी के हमलों ने पाकिस्तान में 2,400 से अधिक मौतें दर्ज कीं, जो सुरक्षा चुनौती को उजागर करता है.
Tehrik-e-Taliban Pakistan (TTP), जिसे पाकिस्तान तालिबान या पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है, एक देवबंदी जिहादी आतंकी संगठन है. यह 2007 में विभिन्न पाकिस्तानी उग्रवादी समूहों के गठबंधन से बना था, जिसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तानी सरकार को उखाड़ फेंकना, शरिया कानून लागू करना और पाकिस्तान में इस्लामी अमीरात स्थापित करना है. इसका गठन बैतुल्लाह मेहसूद ने किया था, और वर्तमान में इसका नेतृत्व नूर वाली मेहसूद कर रहे हैं. टीटीपी मुख्य रूप से खैबर पख्तूनख्वा प्रांत और अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में सक्रिय है.
यह संगठन अल-कायदा और अफगान तालिबान से वैचारिक रूप से जुड़ा हुआ है, लेकिन इसका कमांड स्ट्रक्चर अलग है. टीटीपी ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, नागरिकों और चीनी नागरिकों पर हमले किए हैं, जिसमें 2014 का पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल हमला (150 से अधिक मौतें, ज्यादातर बच्चे) सबसे कुख्यात है.
2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद टीटीपी की गतिविधियां तेज हुई हैं, और 2024-2025 में इसके हमलों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है. 2025 में पाकिस्तान में टीटीपी से जुड़े हमलों में सैकड़ों मौतें हुईं, और 2026 की शुरुआत में भी यह खतरा बना हुआ है.