अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता- विशाल डडलानी और पूनावाला को ट्वीटर पोस्ट पर सुप्रीम राहत
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता- विशाल डडलानी और पूनावाला को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत
नई दिल्ली | डेस्क: सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज कर दिया है , जिसमें संगीतकार विशाल डडलानी और कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला पर ट्विटर पर जैन संत तरुण सागर का कथित रूप से अपमान करने के लिए 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. यह तब हुआ जबकि उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज कर दिया गया था.
अदालत ने कहा कि नैतिक पुलिसिंग करना न्यायालयों का काम नहीं है और उसने पुजारी द्वारा किए गए योगदान की तुलना डडलानी और पूनावाला के योगदान से करने वाली उच्च न्यायालय की टिप्पणी को अस्वीकार कर दिया.
अदालत ने कहा-" हमारा मानना है कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते समय यह पाया गया कि कोई भी अपराध नहीं बनता है, इसलिए उच्च न्यायालय को अपीलकर्ता को यह बताकर सलाहकार अधिकार क्षेत्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए था कि पुजारी द्वारा किया गया योगदान अपीलकर्ता और अन्य आरोपियों द्वारा किए गए योगदान से कहीं अधिक था. न्यायालय का कार्य नैतिक पुलिसिंग करना नहीं है "
न्यायमूर्ति अभय ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय को ददलानी और पूनावाला पर जुर्माना नहीं लगाना चाहिए था, क्योंकि उसने माना था कि उनके खिलाफ कोई अपराध नहीं किया गया है और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उनके मौलिक अधिकार को बरकरार रखा है.
क्या था मामला
गौरलतब है कि संगीतकार विशाल डडलानी ने अपने एक ट्वीट में जैन साधु तरुण सागर की नग्न उपस्थिति और हरियाणा सरकार द्वारा उन्हें विधानसभा में बुलाने की कार्रवाई की आलोचना की थी. इसी तरह राजनीतिक टिप्पणीकार तहसीन पूनावाला ने जैन संत के साथ एक अर्ध-नग्न महिला की फोटोशॉप की हुई तस्वीर पोस्ट की और सामाजिक मानदंडों पर सवाल उठाया.
उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि शिकायत में भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए, 295ए, 509 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ई के तहत कोई अपराध नहीं बनता. लेकिन अदालत ने कहा कि दोनों ने जैन मुनि तरुण सागर का अपमान किया है और जैन धर्म के अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है.
कोर्ट ने इसके बाद भी यह कहते हुए दोनों पर 10-10 लाख का जुर्माना लगाया कि ताकि भविष्य में वे सोशल मीडिया पर प्रचार के लिए किसी धार्मिक संप्रदाय के प्रमुख का मजाक न उड़ाएं.