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मोजतबा खामेनेई ने की देश में 'पवित्र एकता' का आह्वान

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19 जुल. 2026, 10:13 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

मोजतबा खामेनेई
मोजतबा खामेनेई

नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और भीषण गोलाबारी के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का एक बड़ा बयान सामने आया है. इस साल मार्च में पदभार संभालने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए संदेश में खामेनेई ने एक तरफ जहां वाशिंगटन को इस संघर्ष में "कभी न भूलने वाला सबक" सिखाने की सख्त चेतावनी दी है, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर पैदा हो रहे गहरे राजनीतिक मतभेदों को दूर करने के लिए 'पवित्र एकता' का आह्वान किया है. 


यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच पिछले आठ दिनों से लगातार भारी गोलाबारी जारी है और ईरान के कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे अमेरिकी हवाई हमलों में तबाह हो चुके हैं.


ईरान के भीतर अमेरिका के साथ हाल ही में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) को लेकर कट्टरपंथियों और सरकार के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है. जून में ईरान और अमेरिका के बीच चार महीने के युद्धविराम को लेकर एक समझौता हुआ था, जिसे लेकर देश के कट्टरपंथी धड़े बेहद गुस्से में हैं. 


इन प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ईरान को एक खराब समझौते को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया था. इस विवाद के बीच सर्वोच्च नेता खामेनेई ने स्पष्ट किया कि हालांकि इस समझौते को लेकर उनका व्यक्तिगत दृष्टिकोण अलग था, लेकिन राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन द्वारा जिम्मेदारी लेने के बाद उन्होंने इसे अपनी मंजूरी दी थी. 


अब उन्होंने देश के सभी अधिकारियों और नागरिकों को सख्त हिदायत दी है कि वे आपसी राजनीतिक विवादों, विभाजनों और सामाजिक मतभेदों से पूरी तरह दूर रहें, ताकि ईरान के दुश्मन उनकी किसी भी कमजोरी का फायदा न उठा सकें.


खामेनेई के इस एकता संदेश के बाद ईरानी प्रशासन और सैन्य कमान ने विदेशी ताकतों को एकजुटता का संदेश देने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. ईरान के युद्धकालीन संयुक्त कमान के प्रमुख अली अब्दुल्लाही ने सर्वोच्च नेता के निर्देश का पालन करने का संकल्प लेते हुए अमेरिका को 'बड़ा शैतान' करार दिया और हालिया हमलों का विनाशकारी जवाब देने की धमकी दी. 


वहीं, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि इस ऐतिहासिक मोड़ पर सरकार, न्यायपालिका और संसद पर भरोसा रखना तथा आंतरिक मतभेदों को भुलाना ही देश की संप्रभुता की रक्षा करने का एकमात्र रास्ता है.


ईरानी मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह एकजुटता विशेष रूप से वाशिंगटन के उन दावों का खंडन करने के लिए दिखाई जा रही है, जिसमें अमेरिकी अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई हालिया सैन्य कार्रवाई के लिए ईरान के एक भटके हुए कट्टरपंथी धड़े को जिम्मेदार ठहराया था. 


इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने एक साक्षात्कार में युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत जारी रखी है. उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि अगर अप्रैल में समय रहते संघर्ष विराम हो गया होता, तो देश अपने मारे गए सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी, खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब और अमेरिकी बमबारी में नष्ट हुए प्रमुख पेट्रोकेमिकल व स्टील संयंत्रों को बचा सकता था. 


फिलहाल, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों में जारी जवाबी हमलों के कारण यह शांति समझौता पूरी तरह से टूटने की कगार पर पहुंच गया है और फिलहाल दोनों देशों के बातचीत की मेज पर लौटने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP