हसदेव अरण्य में खनन से 3.68 लाख पेड़ प्रभावित
रायपुर । संवाददाता: लोकसभा में दी जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में खनन से 3.68 लाख पेड़ प्रभावित होंगे. छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य, जो मध्य भारत के सबसे बड़े सघन वन क्षेत्रों में से एक है, में पारसा ईस्ट केते बासन कोयला खनन परियोजना के कारण 3,68,217 पेड़ प्रभावित होंगे.
गौरतलब है कि हसदेव अरण्य में चार कोयला खदान राजस्थान सरकार को आवंटित हैं, जिनका एमडीओ अडानी समूह के पास हैं. इन चार खदानों के नाम है-परसा ईस्ट केते बासन-1, परसा ईस्ट केते बासन-2, परसा और केते एक्सटेंशन.
सोमवार को पर्यावरण राज्य मंत्री किर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा बताया कि हसदेव अरण्य 1,70,000 हेक्टेयर में फैला है और इसके नीचे 22 कोयला ब्लॉक मौजूद हैं.
यह जानकारी बिहार के सांसद राजा राम सिंह (सीपीआई-मार्क्सवादी-लेनिनवादी लिबरेशन) के एक सवाल के लिखित जवाब में दी गई. सांसद ने पूछा था कि क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि अदानी एंटरप्राइजेज की परियोजना के लिये 2 लाख से अधिक पेड़ काटे गये हैं.
उन्होंने पेड़ों की कटाई, पर्यावरणीय मंजूरी, स्थानीय विरोध, वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत आदिवासी दावों और क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता के बारे में पूछा था. सांसद ने जलवायु संकट के बावजूद जैव विविधता से भरपूर वन में बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की अनुमति देने के कारण भी पूछे.
मंत्री ने बताया कि परियोजना विस्तार के लिये दो बार अनुमति दी गई. उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार के वन भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव का हवाला देते हुये कहा कि 3,68,217 पेड़ प्रभावित होंगे. अनुमति प्रतिपूरक वनीकरण, नेट प्रेजेंट वैल्यू का भुगतान और अन्य उपयुक्त शमन उपायों की शर्तों के साथ दी गई है.
मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड ने 2009 में सरगुजा जिले के परसा, केते, बासन, सालही, हरिहरपुर, घाटबर्रा और परोगिया गांवों में सार्वजनिक सुनवाई की थी. विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने पर्यावरणीय मंजूरी देने से पहले इन सुनवाइयों में उठाये गए मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और प्रस्ताव को मंजूरी दी.
मंत्री ने बताया कि सितंबर 2016 में कोयला खनन और वाशरी क्षमता को 10 एमटीपीए से बढ़ाकर 15 एमटीपीए करने के लिये एक और सार्वजनिक सुनवाई हुई. इस दौरान खदान उत्सर्जन, प्रदूषित जल के उपचार, कोयले के परिवहन, रोजगार, संस्कृति, परंपराओं और पुनर्वास जैसे मुद्दे उठे. इन पर विचार के बाद प्रस्ताव को पर्यावरणीय मंजूरी दी गई.
फरवरी 2022 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सितंबर 2017 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, कोयला उत्पादन को 15 से 18 एमटीपीए (20% विस्तार) करने के लिये विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की सिफारिशों पर एक और मंजूरी दी गई.
मंत्री ने कहा कि इस विस्तार परियोजना के हिस्से के रूप में, कोयला खनन और वाशरी का संचयी प्रभाव आकलन किया गया, जिसमें हवा, पानी, मिट्टी, वन कवर और जैव विविधता पर प्रभाव का मूल्यांकन शामिल है. पर्यावरण प्रभाव आकलन में धूल दमन, जल प्रबंधन, शोर नियंत्रण और पुनर्वनीकरण योजनाओं जैसे विशिष्ट शमन उपाय शामिल हैं.
मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार हसदेव क्षेत्र सहित सभी खनन गतिविधियों को पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ तरीके से करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि खनन की अनुमति वन संरक्षण अधिनियम 1980, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और अन्य लागू कानूनों, नियमों और दिशानिर्देशों के प्रावधानों को ध्यान में रखकर दी जाती है.
जनवरी 2022 में पर्यावरण मंत्रालय ने विरोध के बावजूद हसदेव अरण्य में 1,136 हेक्टेयर में कोयला खनन की अनुमति दी थी.
मंत्रालय की वन सलाहकार समिति ने 23 दिसंबर को राजस्थान की बिजली वितरण उपयोगिता के स्वामित्व वाले पीईकेबी ब्लॉक में खनन विस्तार के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, क्योंकि 762 हेक्टेयर की पहली आवंटन में कोयला भंडार अनुमान से पहले समाप्त हो गया था.