मेसी!मेसी!मेसी: वर्ल्ड कप में हैट्रिक दागकर रचा इतिहास
रायपुर । सीजीखबरडेस्क: फुटबॉल के जादूगर लियोनेल मेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दुनिया उनकी दीवानी क्यों है. फीफा वर्ल्ड कप 2026 के अपने पहले ही मुकाबले में मेसी ने शानदार हैट्रिक लगाकर अर्जेंटीना को अल्जीरिया के खिलाफ 3-0 से एकतरफा जीत दिला दी. मैच से पहले मेसी की फिटनेस को लेकर सस्पेंस बना हुआ था, लेकिन मैदान पर उतरते ही उन्होंने अपनी चोट की खबरों को दरकिनार करते हुए विपक्षी टीम के डिफेंस को तहस-नहस कर दिया. मेसी ने मैच में चार बार गेंद को गोल पोस्ट में डाला था, हालांकि उनका पहला गोल ऑफसाइड करार दिया गया.
सजे रिकॉर्ड्स के नए कीर्तिमान
इस ऐतिहासिक मुकाबले में मैदान पर कदम रखते ही मेसी के नाम कई बड़े रिकॉर्ड दर्ज हो गए. वह दुनिया के पहले ऐसे फुटबॉलर बन गए हैं जिन्होंने छह अलग-अलग वर्ल्ड कप (2006 से 2026 तक) में हिस्सा लिया है.
इसके साथ ही, वह क्रिस्टियानो रोनाल्डो के बाद पांच अलग-अलग वर्ल्ड कप संस्करणों में गोल करने वाले दुनिया के दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं. अल्जीरिया के खिलाफ यह मैच मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का 200वां मुकाबला था, और वह इस आंकड़े तक पहुंचने वाले दुनिया के महज तीसरे खिलाड़ी हैं.
इस हैट्रिक के साथ ही वह रोनाल्डो को पछाड़कर वर्ल्ड कप इतिहास में हैट्रिक लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए हैं, और अब वह वर्ल्ड कप में सर्वाधिक गोल करने के मामले में जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोस के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर पहुंच गए हैं.
बढ़ती उम्र में बदला खेलने का अंदाज
39 वर्ष की उम्र में भी अर्जेंटीना की टीम पूरी तरह से मेसी के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है. कोच लियोनेल स्कालोनी ने उन्हें मैदान पर कहीं भी खुलकर खेलने की आजादी दी है, जिससे वह और भी खतरनाक साबित हो रहे हैं.
साल 2006 में एक विस्फोटक विंगर के रूप में करियर शुरू करने वाले मेसी अब एक बेहतरीन प्लेमेकर की भूमिका में ढल चुके हैं, जो न सिर्फ खुद गोल करते हैं बल्कि साथियों के लिए मौके भी बनाते हैं.
हालांकि उम्र के इस पड़ाव पर इसे मेसी का आखिरी वर्ल्ड कप माना जा रहा है, लेकिन उनके मौजूदा फॉर्म और फिटनेस को देखकर फैंस को उम्मीद है कि वह आगे भी अपना जलवा बिखेरते रहेंगे.
लियोनेल मेसी की जीवनी
अर्जेंटीना के रोजारियो में 24 जून 1987 को जन्मे लियोनेल एंड्रेस मेसी का बचपन बेहद संघर्षपूर्ण रहा. महज 11 साल की उम्र में वे 'ग्रोथ हार्मोन डेफिसिएंसी' (विकास हार्मोन की कमी) नामक बीमारी के शिकार हो गए थे, जिसके इलाज का खर्च उनके मध्यमवर्गीय परिवार के लिए उठाना नामुमकिन था. मेसी की फुटबॉल प्रतिभा को भांपते हुए स्पेन के मशहूर क्लब बार्सिलोना ने उनके इलाज का जिम्मा उठाया, जिसके बाद मेसी अपने परिवार के साथ स्पेन चले गए.
बार्सिलोना की मशहूर 'ला मासिया' एकेडमी से तराशे गए मेसी ने साल 2004 में महज 17 साल की उम्र में क्लब के लिए अपना सीनियर डेब्यू किया. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बार्सिलोना को 10 ला लीगा खिताब और 4 चैंपियंस लीग ट्रॉफी जिताने में मुख्य भूमिका निभाई. व्यक्तिगत तौर पर रिकॉर्ड 8 बार बैलन डी'ओर (सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर का पुरस्कार) जीतने वाले मेसी ने बार्सिलोना के बाद पेरिस सेंट-जर्मेन (PSG) और फिर इंटर मियामी का रुख किया.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे इंतजार और आलोचनाओं के बाद, मेसी ने साल 2021 में कोपा अमेरिका और फिर साल 2022 में कतर में अर्जेंटीना को फीफा वर्ल्ड कप जिताकर अपने करियर को पूर्णता दी.
पेले-डिएगो माराडोना-मेसी
फुटबॉल के इतिहास में ब्राजील के पेले और अर्जेंटीना के डिएगो माराडोना को जिस तरह का ईश्वरीय दर्जा हासिल था, आधुनिक युग में लियोनेल मेसी ने उस विरासत को न सिर्फ संभाला है बल्कि उसे एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है. पेले की अद्भुत गोल करने की क्षमता और माराडोना की जादुई ड्रिबलिंग व नेतृत्व क्षमता के बाद, दुनिया को एक ऐसे खिलाड़ी की तलाश थी जो फुटबॉल को उसी खूबसूरती से खेल सके, और मेसी ने पिछले दो दशकों से इस खेल पर राज करके उस खालीपन को पूरी तरह भर दिया है.
माराडोना की ही तरह अर्जेंटीना की मिट्टी से निकले मेसी ने जब साल 2022 में देश को अपनी कप्तानी में वर्ल्ड कप जिताया, तो उन्होंने खुद को अपने आदर्श माराडोना के समकक्ष खड़ा कर लिया.
मैदान पर उनकी बेजोड़ दूरदर्शिता, गेंद पर गजब का नियंत्रण और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की भूख ने उन्हें दुनिया के कोने-कोने में, चाहे वह लैटिन अमेरिका हो, यूरोप हो या एशिया का कोलकाता, सबका चहेता बना दिया है.
आज के दौर में जहां फुटबॉल बेहद तेज और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो चुका है, वहां मेसी का अपनी जादुई कलात्मकता को बनाए रखना ही उन्हें पेले और माराडोना के बाद फुटबॉल जगत का सबसे बड़ा महानायक और सर्वकालिक महान खिलाड़ी (GOAT) बनाता है, जिनकी दीवानी पूरी दुनिया है.