भारत में UPI भुगतान पर लग सकता है मर्चेंट शुल्क
नई दिल्ली । डेस्क: भारत की सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर जल्द ही मर्चेंट शुल्क (MDR) की वापसी हो सकती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट' में संशोधन का प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद इसकी कानूनी राह साफ होती दिख रही है.
इस कदम से मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने का कानूनी आधार तैयार होगा, हालांकि अभी फीस की दरों और इसके दायरे को लेकर अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है.
गूगल पे और फोनपे जैसे डिजिटल भुगतान दिग्गजों के साथ-साथ उद्योग विशेषज्ञ लंबे समय से शून्य शुल्क नीति के कारण नए निवेश में आ रही दिक्कतों की बात उठा रहे थे. वर्तमान में जहां क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर मर्चेंट से 0.9% से 1.5% तक का शुल्क लिया जाता है, वहीं UPI व्यापारियों के लिए पूरी तरह से मुफ्त है.
इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार दो प्रमुख विकल्पों पर विचार कर रही है. पहले प्रस्ताव के तहत सालाना 1.5 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाले बड़े व्यापारियों पर 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.3% से 0.5% तक का MDR लगाया जा सकता है.
वहीं दूसरे प्रस्ताव में कारोबार के आकार के आधार पर फीस तय करने की योजना है. इस बदलाव का उद्देश्य आम ग्राहकों और छोटे दुकानदारों पर कोई अतिरिक्त बोझ डाले बिना बड़े व्यापारियों के माध्यम से डिजिटल भुगतान तंत्र को आत्मनिर्भर बनाना है.