टीसीएस में भारी छंटनी, क्या आईटी सेक्टर संकट में है?
नई दिल्ली । डेस्क: भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने 2025-26 वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के अंत में अपने कुल कर्मचारियों की संख्या घटकर 5,82,163 होने की जानकारी दी है. यह आंकड़ा सितंबर तिमाही के अंत में मौजूद 5,93,314 कर्मचारियों की तुलना में 11,151 कम है.
इसके साथ ही टीसीएस में लगातार दूसरी तिमाही में कर्मचारियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. केवल दो तिमाहियों में कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 30,000 से अधिक घट चुकी है, जिससे आईटी सेक्टर में रोजगार संकट को लेकर चिंता गहराती जा रही है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट वैश्विक आर्थिक सुस्ती, अमेरिका और यूरोप में तकनीकी खर्च में कटौती, तथा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का परिणाम है. इन क्षेत्रों से भारत के आईटी राजस्व का लगभग 70 प्रतिशत आता है. बैंकिंग, फाइनेंस और रिटेल जैसे क्षेत्रों में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आईटी अपग्रेड पर खर्च 15 से 20 प्रतिशत तक घट गया है.
इसके साथ ही आईटी कंपनियों में एट्रिशन रेट भी तेज़ी से कम हुआ है. जहां 2022 में यह दर 20–22 प्रतिशत थी, वहीं 2025 में घटकर 11–13 प्रतिशत रह गई है. इसका मतलब यह है कि नई भर्तियों की जरूरत कम हो गई है, जिससे कुल कर्मचारी संख्या में स्वाभाविक कमी आ रही है.
विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल अस्थायी मंदी नहीं बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव है. ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग ने आईटी कंपनियों को “स्लिम ऑपरेशंस” की ओर मोड़ दिया है. टेस्टिंग, एप्लिकेशन मेंटेनेंस और डॉक्यूमेंटेशन जैसे क्षेत्रों में एआई के कारण 20–30 प्रतिशत तक दक्षता बढ़ी है, जिससे बड़े प्रोजेक्ट टीमों की जरूरत कम हो गई है.
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर एंट्री-लेवल और मिड-लेवल कर्मचारियों पर पड़ा है. आईटी सर्विस कंपनियों ने एंट्री-लेवल हायरिंग में 30–40 प्रतिशत तक कटौती की है.
वहीं पारंपरिक तकनीकों से जुड़े मिड-लेवल इंजीनियर और सपोर्ट स्टाफ भी दबाव में हैं. हालांकि क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा इंजीनियरिंग, एआई गवर्नेंस और क्लाउड आर्किटेक्चर जैसे विशेष कौशल वाले पदों पर मांग बनी हुई है.
दिलचस्प बात यह है कि जहां टीसीएस ने बड़े पैमाने पर छंटनी की है, वहीं इंफोसिस ने अलग राह अपनाई है. बेंगलुरु स्थित इस कंपनी ने 2025-26 की तीसरी तिमाही में 5,043 नए कर्मचारियों की भर्ती की और चालू वित्त वर्ष में कुल 18,000 से अधिक नई भर्तियां कर चुकी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आईटी उद्योग अब जनसंख्या आधारित भर्ती मॉडल से हटकर गुणवत्ता आधारित प्रतिभा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.
आने वाले समय में रोजगार के अवसर सीमित लेकिन अधिक विशिष्ट कौशल वाले पेशेवरों के लिए होंगे. युवाओं और नए स्नातकों के लिए संदेश साफ है सिर्फ बुनियादी कोडिंग नहीं, बल्कि एआई, क्लाउड-नेटिव टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स जैसी उन्नत क्षमताएं ही भविष्य की नौकरी की सुरक्षा तय करेंगी.