बस्तर में अमृत सरोवर योजना में भारी भ्रष्टाचार
बस्तर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'मिशन अमृत सरोवर योजना' भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने और जलस्तर सुधारने के पवित्र उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना अब विवादों में है. नियमों को ताक पर रखकर मजदूरों की जगह जेसीबी मशीनों से काम कराया गया और जिन गरीबों ने पसीना बहाया, वे पिछले तीन साल से अपनी मजदूरी के एक-एक पैसे के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं.
यह पूरा मामला बकावंड ब्लॉक के ग्राम पंचायत सतोसा क्रमांक 2 का है. पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की मिलीभगत से इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है और मजदूरों के हक की राशि हड़प ली गई है.
पीड़ित ग्रामीण सोनसिंह नाग, लछिन्धर, पायकु, दलुचन्द कश्यप, मदन कश्यप, दिलेश नाग और सतीश ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि साल 2023 में गांव में इस योजना के तहत तालाब निर्माण का काम शुरू हुआ था. शुरुआत में केवल फोटो खिंचवाने और दिखावे के लिए ग्रामीणों से कुछ दिन काम कराया गया. इसके बाद नियमों के खिलाफ जाकर करीब 4 महीने तक जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टरों से खुदाई करवाई गई.
ग्रामीणों का दावा है कि सरपंच और सचिव के कहने पर उन्होंने अपनी जेब से डेढ़ लाख रुपये का डीजल खरीदकर जेसीबी मालिक को दिया. कुछ ग्रामीणों ने तो उधारी पर डीजल लेकर अपने ट्रैक्टर भी काम में लगाए. तालाब बनकर तैयार हो गया, लेकिन जब ग्रामीणों ने अपनी मेहनत की कमाई और गाड़ियों का पैसा मांगा, तो उन्हें सिर्फ टालमटोल भरा जवाब मिला.
बीते तीन सालों में कई महीनों की कड़ी मेहनत और खुद का पैसा लगाने के बदले ग्रामीणों को महज 7 हजार रुपये का भुगतान किया गया है. पैसे न मिलने के कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है और वे कर्ज के दलदल में डूब रहे हैं.
नियमों के मुताबिक, अमृत सरोवर और मनरेगा जैसे कार्यों में स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता देकर रोजगार सुनिश्चित करना होता है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोका जा सके. लेकिन सतोसा पंचायत में मशीनों का खुलेआम इस्तेमाल कर न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं, बल्कि ग्रामीणों के हक पर भी डाका डाला गया.
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए बकावंड ब्लॉक के एसडीएम मनीष वर्मा ने कहा है कि ग्रामीणों की तरफ से अमृत सरोवर निर्माण में गड़बड़ी और भुगतान न होने की लिखित शिकायत मिली है. मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अब देखना होगा कि प्रशासन इन बेबस ग्रामीणों को उनका हक कितने समय में दिला पाता है.