सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

लू की चपेट में हाशिए के समुदाय: 20 साल में 20,000 मौतें

छत्तीसगढ़ भारत में लू की चपेट में सबसे ज्यादा निम्न जातियों के लोग आते हैं

C

CG Khabar

24 मई 2025, 01:28 PM 4 मिनट में पढ़ें 4

भारत में हीटवेव का शिकार वंचित समुदाय
भारत में हीटवेव का शिकार वंचित समुदाय

रायपुर | डेस्कः भारत में 2001 से 2019 के बीच हीटवेव यानी लू के कारण करीब 20,000 लोगों की मौत हुई है, जिसमें हाशिए पर मौजूद समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है.


यह जानकारी एक हालिया अध्ययन में निकलकर सामने आयी है, जो जलवायु परिवर्तन और सामाजिक असमानता के बीच गहरा संबंध उजागर करती है. अध्ययन में पाया गया कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में लू से होने वाली मौतों की आशंका अधिक है.

विज्ञापन


लू के चलते आर्थिक रूप से पिछड़े व वंचित वर्ग से ताल्लुक रखने वाले लोगों की मौतें, अन्य समुदायों की तुलना में कहीं ज्यादा हुईं हैं.


अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने इसे 'थर्मल इनजस्टिस' (गर्मी से जुड़ा अन्याय) करार दिया है.


हरियाणा के सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मौसम विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का विश्लेषण कर बताया कि इस अवधि में हीटस्ट्रोक से 19,693 और अत्यधिक ठंड से 15,197 मौतें दर्ज की गईं.


हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि अत्यधिक तापमान से होने वाली मौतों की रिपोर्टिंग अक्सर अपर्याप्त होती है. 


जाति और लिंग आधारित असमानता

अध्ययन में पाया गया कि 45-60 वर्ष की आयु के लोग हीटस्ट्रोक और ठंड दोनों से सबसे अधिक प्रभावित हुए. इसके बाद 60 वर्ष से अधिक और 30-45 वर्ष के लोग.


पुरुषों में हीटस्ट्रोक से मृत्यु दर महिलाओं की तुलना में तीन से पांच गुना अधिक थी. इसका कारण "कामकाजी उम्र के पुरुषों का अधिक समय बाहर काम करना है, जिससे वे लू से अधिक प्रभावित होते हैं."


आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पंजाब में हीटस्ट्रोक से सबसे अधिक मौतें दर्ज की गईं.


एक अन्य अध्ययन, जिसमें इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (बेंगलुरु और अहमदाबाद) के शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट डेटा और पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) का उपयोग किया है.   


इसने 'थर्मल इनजस्टिस' को और ज्यादा स्पष्ट किया. इसमें बताया गया कि अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोग अपने कामकाजी समय का 43-49% हिस्सा बाहरी कार्यों में बिताते हैं. जबकि उच्च जातियों के लिए यह 27-28% है. 


हीटवेव और थर्मल इनजस्टिस

हीटवेव यानी लू मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती है. और हीट स्ट्रोक – जो केवल थकान और चक्कर आने जैसे हल्के लक्षण ही नहीं बल्कि मृत्यु का कारण भी बन सकता है.


हरियाणा के सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक टीम ने भारत में अत्यधिक बाहरी तापमान के कारण होने वाली मौतों का अध्ययन किया.


उन्होंने ऐसी मौतों में उम्र और लिंग के आधार पर असमानताओं को भी देखा. इसके लिए उन्होंने कई सरकारी स्रोतों से आंकड़ों का विश्लेषण किया– जैसे कि मौसम विज्ञान विभाग से तापमान संबंधी आंकड़े और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से मृत्यु दर के आंकड़े.


अध्ययन में कहा गया, जाति, पेशा और गर्मी से होने वाले तनाव के बीच ये मजबूत संबंध ही ‘थर्मल इनजस्टिस’ कहलाता हैं.


जलवायु परिवर्तन की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र के इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की 2021 की रिपोर्ट ने चेतावनी दी थी कि भारत सहित एशिया में हीटवेव जैसी चरम मौसमी घटनाएं बढ़ेंगी.


भारत के मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, फरवरी 2025 पिछले 125 वर्षों में सबसे गर्म फरवरी रही, जो बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के खतरों को रेखांकित करता है.


'थर्मल इनजस्टिस' का सामाजिक आयाम

शोधकर्ताओं का कहना है कि जातिगत असमानता और बाहरी कार्यों की प्रकृति 'थर्मल इनजस्टिस' को बढ़ावा देती है.


ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नंदिता भान ने कहा, सरकार को कम आय वाले और दिहाड़ी मजदूरों के लिए सामाजिक सहायता योजनाओं पर विचार करना चाहिए, जो चरम तापमान में भी काम करने को मजबूर हैं.


अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि जलवायु अनुकूलन योजनाओं में जातिगत श्रम विभाजन को ध्यान में रखा जाए.


तत्काल कदम उठाना जरूरी

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है. भारत में लू की घटनाएं और घातक हो सकती हैं.


प्रोफेसर गुइन ने जोर देकर कहा, "लोगों को अत्यधिक तापमान के खतरों के प्रति जागरूक करना और इसके प्रभाव को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाना जरूरी है."


विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर डेटा संग्रह, मजदूरों के लिए सुरक्षा उपाय और जलवायु परिवर्तन के प्रति समावेशी नीतियां इस 'थर्मल इनजस्टिस' को कम कर सकती हैं.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP