रवि, 18 अक्टू. 2026

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मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने जीता बाफ्टा (BAFTA) अवॉर्ड

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23 फ़र. 2026, 03:36 AM 3 मिनट में पढ़ें 5

बूंग मणिपुरी फिल्म
बूंग मणिपुरी फिल्म

लंदन । डेस्क: भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए, मणिपुरी भाषा की फिल्म ‘बूंग’ ने प्रतिष्ठित बाफ्टा (BAFTA) फिल्म अवॉर्ड्स में 'बेस्ट चिल्ड्रेन्स एंड फैमिली फिल्म' का खिताब अपने नाम किया है. लंदन के रॉयल फेस्टिवल हॉल में आयोजित इस भव्य समारोह में फिल्म की निर्देशक लक्ष्मीप्रिया देवी और निर्माता फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी, विकेश भूटानी व एलन मैकएलेक्स ने स्वयं उपस्थित होकर यह सम्मान प्राप्त किया.


लक्ष्मीप्रिया देवी द्वारा निर्देशित यह फिल्म एक भावुक ड्रामा है, जो मणिपुर के एक स्कूली लड़के ‘बूंग’ की कहानी बयां करती है. 

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फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे वह अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और लचीलेपन के दम पर मणिपुर में जातीय तनाव और सीमावर्ती चुनौतियों के बीच अपने बिखरे हुए परिवार को फिर से एकजुट करने की कोशिश करता है. 


फिल्म में गुगुन किपगेन, बाला हिजाम निंगथौजम और अंगोम सनामतुम ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं.


‘बूंग’ ने इस श्रेणी में 'ज़ूटोपिया 2', 'लिलो एंड स्टिच' और फ्रांसीसी साइंस-फिक्शन फिल्म 'आर्को' जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की चर्चित फिल्मों को पछाड़कर यह जीत हासिल की है. 


इससे पहले इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर 2024 के टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में हुआ था, जिसके बाद इसे वारसॉ, मामी (MAMI), भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) और मेलबर्न के भारतीय फिल्म महोत्सव जैसे कई वैश्विक मंचों पर सराहा गया. 


यह जीत न केवल उत्तर-पूर्वी भारत की कहानियों को वैश्विक पहचान दिलाती है, बल्कि भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा की बढ़ती ताकत को भी प्रदर्शित करती है.


गौरतलब है कि पिंच फिल्म्स और एक्सेल एंटरटेनमेंट के सहयोग से बनी यह फिल्म 'बूंग' न केवल अपनी कहानी के लिए बल्कि अपनी सिनेमाई बुनावट के लिए भी विशेष चर्चा में रही है. निर्देशक लक्ष्मीप्रिया देवी, जिन्होंने पूर्व में 'लाइफ ऑफ पाई' और 'अक्टूबर' जैसी फिल्मों में सहायक के रूप में काम किया था, इस फिल्म के माध्यम से अपनी जड़ों की ओर लौटी हैं. 


फिल्म की कहानी मणिपुर के मोरेह (Moreh) शहर की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो भारत और म्यांमार की सीमा पर स्थित एक अनूठा व्यापारिक केंद्र है. इस स्थान की सांस्कृतिक विविधता और वहां की जटिल सामाजिक परिस्थितियों को फिल्म में बहुत ही बारीकी से दिखाया गया है. 


कथानक के केंद्र में छोटा बच्चा बूंग है, जिसे लगता है कि अगर वह अपने लापता पिता को घर वापस ले आता है, तो उसकी माँ के चेहरे पर मुस्कान वापस आ जाएगी और उसका परिवार फिर से खुशहाल हो जाएगा. 


यह फिल्म बच्चों के नजरिए से एक गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट को देखती है, जिससे यह एक 'कमिंग-ऑफ-एज' ड्रामा बन जाती है. 


फिल्म की शूटिंग वास्तविक लोकेशन्स पर की गई है, जो पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक सुंदरता और वहां के स्थानीय जीवन का एक प्रमाणिक चित्रण पेश करती है. 


आलोचकों ने विशेष रूप से छोटे कलाकारों के सहज अभिनय और फिल्म के संगीत की सराहना की है, जो सीमावर्ती तनाव के बीच भी मानवीय संवेदनाओं और उम्मीदों को जीवित रखने का संदेश देती है. 


अपनी वैश्विक यात्रा के दौरान इस फिल्म ने न केवल पुरस्कार जीते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को मणिपुर की विशिष्ट पहचान और वहां की लोककथाओं जैसी सरलता से भी परिचित कराया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP