ममता ने ठुकराया 'संविधान हत्या दिवस'
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' मनाने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया. तृणमूल कांग्रेस ने इस आयोजन से दूरी बनाने का फैसला किया है, जिससे केंद्र के साथ नया विवाद शुरू हो गया है.
बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने केंद्र के पत्र को दिखाते हुए कहा, "मुझे इस आयोजन के नाम से आपत्ति है. अगर इमरजेंसी का विरोध करना था, तो वही शब्द इस्तेमाल करते. आज देश में हर दिन संविधान की हत्या हो रही है."
उन्होंने महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश में सरकारें गिराने और मीडिया व चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाये.
1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाये गये आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर बीजेपी इसे 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता दौरे के दौरान यह निर्देश दिया गया था.
ममता ने कहा कि वह भी आपातकाल के खिलाफ थीं और तृणमूल कांग्रेस इसका विरोध करने के लिए वैकल्पिक कार्यक्रम आयोजित करेगी.
उन्होंने कहा, "मैं उस समय कांग्रेस में थी और छात्र राजनीति का हिस्सा थी. जनता ने आपातकाल को कभी स्वीकार नहीं किया." उन्होंने यह भी जोड़ा कि राहुल गांधी भले ही विपक्ष के नेता हों, लेकिन छोटे दलों को भी ऐसे फैसलों में अपनी राय रखने का मौका मिलना चाहिए.
राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस बीजेपी को कोई मौका नहीं देना चाहती. वहीं, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "आपातकाल लोकतंत्र पर काला धब्बा था. ममता का इसका विरोध करना आश्चर्यजनक नहीं है."