ममता और उद्धव ने की नए सिरे से चुनाव कराने मांग की
नई दिल्ली । डेस्क: चुनाव आयोग के भीतर विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को लेकर आंतरिक मतभेद और आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है. इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही प्रमुख विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने इस मुद्दे पर आयोग को घेरते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं और हाल ही में संपन्न हुए चुनावों को रद्द कर फिर से मतदान कराने की मांग की है.
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में पुरानी मतदाता सूची के आधार पर फिर से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करने की भी वकालत की.
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग ने मिलकर बंगाल विधानसभा चुनावों में धांधली की है. उन्होंने कहा कि जहां भी ईवीएम पर सवाल उठे हैं या मतदाताओं को मतदान से रोका गया है, वहां पुरानी मतदाता सूची के जरिए नए सिरे से चुनाव आयोजित किए जाने चाहिए.
इसी क्रम में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र, बंगाल और तमिलनाडु में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों को शून्य घोषित करने की मांग की. उद्धव ठाकरे ने बैलेट पेपर (मतपत्र) से फिर से चुनाव कराने की पैरवी करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और जेल भेजने की बात कही.
उन्होंने उस रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि अन्य चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने उनकी जानकारी के बिना लिए गए निर्णयों पर बार-बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सपा समर्थकों के नाम योजनाबद्ध तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए. उन्होंने कहा कि उपचुनावों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई और शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई.
अखिलेश यादव ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर स्वतः संज्ञान ले. इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया और अधिकारियों के तबादलों की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए.
वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने राज्य में जारी एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के भीतर हुई पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए तथा इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
विपक्ष के इन तीखे हमलों और रिपोर्ट्स पर चुनाव आयोग ने भी अपना पक्ष रखा है. आयोग ने किसी भी प्रकार के आंतरिक विभाजन की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे. आयोग के अनुसार, निर्णय प्रक्रिया के दौरान लिखित टिप्पणियां और आंतरिक विचार-विमर्श किसी भी लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्था की एक सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा हैं.