मालेगांव बम विस्फोट पीड़ितों के परिजनों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दी चुनौती
मुंबई । डेस्क: 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में सभी सात आरोपियों, जिनमें पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित शामिल हैं, के बरी होने के खिलाफ पीड़ितों के परिजनों ने मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की है.
जमीयत उलेमा महाराष्ट्र (अरशद मदनी) लीगल एड कमेटी के माध्यम से निसार अहमद हाजी सैयद बिलाल, शेख लियाकत मोहिउद्दीन, शेख इसहाक, शेख यूसुफ, उस्मान खान, ऐनुल्लाह खान, मुश्ताक शाह, हारून शाह और शेख इब्राहिम शेख के परिजनों ने यह अपील दायर की है.
इस अपील में विशेष एनआईए कोर्ट के 31 जुलाई के फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें सभी आरोपियों को "सबूतों के अभाव" में बरी कर दिया गया था.
अपील में विशेष एनआईए कोर्ट के फैसले को रद्द करने और प्रमुख गवाहों व लापता सबूतों की दोबारा जांच की मांग की गई है. पीड़ितों का आरोप है कि अभियोजन पक्ष ने जानबूझकर महत्वपूर्ण सबूतों को छुपाया या नजरअंदाज किया. अपील वकील मतीन शेख के माध्यम से दायर की गई है.
विशेष एनआईए कोर्ट के जज अभय लाहोटी ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि विस्फोट के लिए मोटरसाइकिल में बम रखा गया था. साथ ही, यह भी साबित नहीं हो सका कि एलएमएल फ्रीडम मोटरबाइक साध्वी प्रज्ञा की थी या लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के आवास पर विस्फोटक सामग्री जमा की गई थी.
इसके चलते, आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत लगाए गए आरोप खारिज कर दिए गए.
कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया था कि मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए.
आरोपियों पर यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य) और धारा 18 (आतंकवादी कृत्य की साजिश), आईपीसी की धारा 120(बी) (आपराधिक साजिश), धारा 302 (हत्या), धारा 307 (हत्या का प्रयास), धारा 324 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), और धारा 153(ए) (दो धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के साथ-साथ आर्म्स एक्ट और विस्फोटक अधिनियम की अन्य धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया था.
महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक इस बरी के खिलाफ हाईकोर्ट में कोई अपील दायर नहीं की है.