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मैनपाट: बॉक्साइट खनन परियोजना का जनसुनवाई में विरोध

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01 जुल. 2026, 02:00 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

मैनपाट जनसुनवाई
मैनपाट जनसुनवाई

अंबिकापुर । संवाददाता: सरगुजा जिले के प्रसिद्ध मैनपाट क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर तीखा विरोध शुरू हो गया है. बुधवार को कमलेश्वरपुर-केसरा में आयोजित जनसुनवाई के दौरान भारी हंगामा और नारेबाजी देखने को मिली, जहां ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और तिब्बती समाज के लोगों ने एकजुट होकर इस परियोजना को निरस्त करने की मांग की. 


प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि इस खनन परियोजना से क्षेत्र के पर्यावरण, प्राकृतिक जल स्रोतों और स्थानीय लोगों के रोजगार पर बेहद बुरा असर पड़ेगा. प्रशासनिक अधिकारियों ने हंगामे के बीच सभी आपत्तियों को दर्ज कर लिया है और उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए शासन के पास भेजने का आश्वासन दिया है.


इस पूरे विवाद में तिब्बती समुदाय के विस्थापन का मुद्दा भी प्रमुखता से उभरा है. जनसुनवाई में शामिल तिब्बती प्रतिनिधियों ने बताया कि प्रस्तावित 145.8 हेक्टेयर खदान क्षेत्र का लगभग 50.3 हेक्टेयर हिस्सा उनके कब्जे में है, जो उन्हें पुनर्वास के दौरान आवंटित किया गया था. 


इस जमीन पर न केवल उनकी आजीविका टिकी है, बल्कि उनका प्रमुख धार्मिक स्थल और मंदिर भी यहीं स्थित है. समुदाय के प्रतिनिधियों ने चिंता जताई कि यदि खनन को मंजूरी मिलती है, तो उनके सामने एक बार फिर विस्थापन का संकट खड़ा हो जाएगा और उनकी सांस्कृतिक व धार्मिक पहचान खतरे में पड़ जाएगी.


आंदोलन को राजनीतिक समर्थन देते हुए सीतापुर के विधायक रामकुमार टोप्पो भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मांगों को जायज ठहराया. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि किसी भी विकास कार्य के लिए स्थानीय जनता की सहमति सबसे महत्वपूर्ण होती है. यदि प्रभावित वर्ग इस परियोजना के खिलाफ है, तो सरकार को उनकी भावनाओं का आदर करना चाहिए. 


विधायक ने स्पष्ट किया कि जनभावनाओं और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना इस बॉक्साइट खदान परियोजना को किसी भी कीमत पर आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा.


इसके साथ ही, जनसुनवाई की प्रशासनिक प्रक्रिया और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं. केसरा ग्राम पंचायत के सरपंच ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट मिलने की पावती पर उनके जाली हस्ताक्षर किए गए हैं और उन्हें नियम के तहत जरूरी दस्तावेज नहीं दिए गए. 


वहीं, कमलेश्वरपुर और रोपाखार के सरपंचों का दावा है कि पर्यावरण रिपोर्ट उन्हें समय पर नहीं मिली, जिससे ग्रामीण अपनी आपत्तियां ठीक से तैयार नहीं कर पाए. 


जनसुनवाई में पहुंचे अधिवक्ता राजेश गुप्ता ने भी पर्यावरण विभाग पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.


गौरतलब है कि मैनपाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और समृद्ध जल स्रोतों के लिए जाना जाता है. ग्रामीणों का तर्क है कि इस संवेदनशील इलाके में बड़े पैमाने पर खुदाई होने से प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा. 


जनसुनवाई के दौरान ग्रामीण हाथों में तख्तियां लेकर पर्यावरण बचाने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए नारे लगाते रहे. क्षेत्र में उपजे इस भारी असंतोष के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और संबंधित विभाग इस विवादित परियोजना को लेकर क्या अंतिम फैसला लेते हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP